Friday, 2 August 2019

ऋग्वेद उतरनी (मंगलाचरण )

ऋग्वेद उतरनी (मंगलाचरण )
मनहरण घनाक्षरी 
(छत्तीसगढ़ी)

 अमर अंजोर रूप ,निरदोष  जग भूप 
जीव अंतस पुर  बसइया जोहार हे |
सब जग रखवार ,जीव राखे फूल भार 
शुभ सत् देशना देवइया जोहार हे ||
सवांगे सता  मे रम ,सुख पावत परम 
अनंत भूषित निरखइया जोहार हे |
तेकर होके उपासी ,सिरजे आनन्दराशी 
सुख धाम आनंद बढ़इया जोहार हे ||

     

शोभामोहन श्रीवास्तव 


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