ऋग्वेद उतरनी (मंगलाचरण )
मनहरण घनाक्षरी
(छत्तीसगढ़ी)
अमर अंजोर रूप ,निरदोष जग भूप
जीव अंतस पुर बसइया जोहार हे |
सब जग रखवार ,जीव राखे फूल भार
शुभ सत् देशना देवइया जोहार हे ||
सवांगे सता मे रम ,सुख पावत परम
अनंत भूषित निरखइया जोहार हे |
तेकर होके उपासी ,सिरजे आनन्दराशी
सुख धाम आनंद बढ़इया जोहार हे ||
शोभामोहन श्रीवास्तव

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