ताटंक छंद (वेद वचन )
(छत्तीसगढ़ी)
सब मनखे मन जानो घर हा ,सब बेरा सुख कारी हो |
अन धन के भंडार भरे अउ,रूख फरे फुलवारी हो ||
पिए बर हो निर्मल पानी ,सुग्घर शुद्ध बयारी हो |
धरम करम के जानन हारा ,धनवंता संगवारी हो ||
घर बनाव तुम सब झन अइसन ,जेमा ए गुन सारी हो |
अइसन घर हो सदा निरोगी ,सुख बढ़ती बडभारी हो ||
शोभामोहन श्रीवास्तव
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