Friday, 16 August 2024

विवेक छन्द (सममात्रिक)12122ललाल लाला, ललाल लाला।।

विवेक छन्द (सममात्रिक)12122

ललाल लाला, ललाल लाला।।


जगत बनाकर, तुम्ही विधाता। 

सम्हालते बन, पिता व माता।।

अपार स्वामी, उदार दाता।

निभा रहे हो, पवित्र नाता। 


पवन,अगन,जल, पवित्रकारी।

अधर नगर नभ, समस्तधारी।।

प्रकाश रवि शशि, लुटा अधारे।। 

घुमा रहे नित, नक्षत्र तारे। 

 

हृदय हमारे, भुवन तुम्हारा। 

सदैव देते, हमे सहारा।।

सदैव छाया, कृपाल पाऊँ। 

विनीत होकर, तुम्हे मनाऊँ।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

विक्रम संवत २०८० 

भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी







 




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