(दृढ़पद छंद)
12, 10 मात्रा में यति
लललल लललल ललला, लालल लालाला।
बनन बनन गिंजरिस हे, तज महल अटारी।
मीरा बाई बनके, मनमोहन प्यारी।।
छोड़छाड़ धन वैभव, सुख के फुलवारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
झींक फूदक के सजवन, फेक सब सिंगारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
मोहन ले नता जोर, पहिर भगवा सारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
मइके ससुरे सबके, सुनिस गल्ला गारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
राजपाठ सुख ले बढ़, पाइस सुख भारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
हरिनाम के धुन में, माते मतवारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
हरि ले बिमुख मन सन, पटिस नहीं तारी।
मीरा बाई बनगे, मनमोहन प्यारी।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
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