बीना धरे हे हाथ मा,साजे मुकुट अउ माथ मा
(सरस्वती वंदना)
हरिगीतिका छंद2212 , 2212 , 2212 , 2212
लालालला लालालला,लालालला लालालला
1/
बीना धरे हे हाथ मा,साजे मुकुट अउ माथ मा ।
गनपति बिराजत छेंव कर,अउ माँझ लक्ष्मी साथ मा ।
हे हाथ मा पुस्तक धरे,बइठे कमल के फूल हे
करधन सजे पैजन बजे, मोती जड़े अउ झूल हे ।
2/
नथली फभे हे सोनहा, मुंँदरी सुघर अँगरी सजे
गर हार दुलरी तीलरी, चूरी सुघर कंगन बजे ।
अँधियार मनके टारथे,गुन ग्यान दियना बारथे।
संसार के दुख मेटके, मन कुंदरा ला झारथे।
3/
सुर ला सजा धुन ला बजा, संगीत सिरजावै उही।
भव पार बर पतवार अउ,जग नाच नचवावै उही।
मन नाद अनहत ला बजा,साधक सुजन ला तारथे ।
बस मध्यमा अउ वैखरी, दुख ताप संकट टारथे ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
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