Tuesday, 30 July 2024

जै सरसती दाई जै सरसत्त्ती।तैं दुर्गा तैं काली सत्ती (सरस्वती वंदना)

जै सरसती दाई जै सरसत्त्ती।
तैं दुर्गा तैं काली सत्ती (सरस्वती वंदना) 


जै सरसती दाई जै सरसत्त्ती।
तैं दुर्गा तैं काली सत्ती। ।
तोर लइका औं निचट गँवार।।
किरपा करके कर उद्धार।।

अखिल ज्ञान गुन के भंडारी।
सादा सारी सोन किनारी।।
पहिरे माला नथली झूल।
बइठे हवस कमल फूल।।

सातों सुर में बीनाबजैया।
डंडासरन तोर लागौं पैंया।।
भरे सभा में रखबे लाज।
मूड़ी उप्पर मोर बिराज।।

आखरबरम रचैया दाई।
सब जग करथे तोर बड़ाई।।
तोरे उपर मोर सब भार।
घेरीबेरी करौं जोहार।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
असाढ़ अंजोरी पाख पुन्नी विक्रम संवत २०८१
तद्नुसार २१/०७/२०२४

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