राष्ट्र भक्ति रोला
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
वह भारत का शत्रु, दंड का है अधिकारी।
राष्ट्रद्रोह में लिप्त, छुपे जो कर गद्दारी ।।
उस सबको पहचान, जेल के अंदर डालो।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
खंडित करके देश, यहीं जो डाले डेरा।
उठा रहे आवाज, न रिश्ता तेरा मेरा।।
बिगड़ रहे हालात, सुनो ऐ सत्ता वालों।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
कुचलो वो फन साँप, देश में जो फुफकारे।
करो न स्तुति गान, बनाकर उन्हें बेचारे।।
भारत में दामाद, बना उनको मत पालो।।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
सत्ता मद में भूल, गढ़े बेढ़गा नारा।
उनका किये विकास, जिन्होने थप्पड़ मारा।।
नाश खड़ा है द्वार, वोट के अरे दलालों।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
भक्त खिलाते भक्ति, भाव से जिसको रोटी।
गौहत्यारे मार, उसी की खाते बोटी।।
भाईचारा भाँड़, जाय अब रार मचा लो।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
छ्द्मयुद्ध में रोज, वीरगति पाये सेना।
तुमको कुर्सी छोड़, नहीं कुछ लेना देना।।
हमसे लेकर वोट, हमें ही छलने वालों।।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
सब बातें बकवास, विकास बेकार तुम्हारा।
संकट में अस्तित्व, खड़ा है आज हमारा।।
विश्वविजय का दंभ, खोखला है मतवालों।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
न्यायमूर्ति अब न्याय, छोड़ बस गाल बजाते।
भ्रष्टाचारी और, दुष्ट पर प्रेम लुटाते।।
रौंदौ मत अस्तित्व, स्वयं के मोटी खालों।।
तृप्तिकरण व्यापार, बंद कर देश संभालो।।
शोभामोहन देख, देश की दुर्गति रोये।
सत्ताओं ने कदम, कदम पर काँटे बोये।।
निश्चित दिखता अंत, हिन्दुओं रक्त उबालो।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१
अंधियारी पाख सावन तिथि - दशमी
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
-
गौरी गौरा गीत जागौ जागौ गौरी गौरा, जगमग जगमग रात हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, रिगबिग करसा हाथ हो। जागौ जागौ गौरी गौरा, आज देवारी के रात हो। ...
-
सैनिक के गोसइन के बिरहा पिंउरी धोवाये गवन कराये चलदेस तभो हें हस लगथे, निकले होबे छोड़त मन। पिंउरी धोवाये गवन कराये, रूप झुलत उही नैन सजन...
-
बइठे तरिया पार भवानी २/कर सजवन सिंगार भवानी । १/ कर सजवन सिंगार भवानी । बइठे तरिया पार भवानी ।। मुण्ड माल गर डार भवानी। सजे तोर दरबार भवान...
No comments:
Post a Comment