Thursday, 30 November 2023

४१ - ५० छत्तीसगढ़ी लोकगीत

४१/
दुखहरनी दुर्गा रूपधर,भुँइया करत निहाल हे।
नवरात्रि परब के धूम हे, गाँव गली उजियार हे।। 

मणिमोती मउर मुकुट सजे, चमचम चमक सुहात हे।
रबिसरीख रूपबखान बर, भाखा नइ मुख आत हे।।

ककनी चूरी पटली पटा, सोने सोन सिंगार हे।
मुँदरी सुंदर चुंदर चटख, दुलरी तिलरी हार हे।। 

झुमका झमाझम झूल झक, बेनीफूल गुँथाय हे।।
रगरग ले नथिया ओंठ अउ, माँगपटिया लगाय हे।।

मनमोहत सोहत करधनी, लर लटक लक झूल हे।
गर पुतरी सूर्रा ले सजे, माला दसमत फूल हे।। 

कर में त्रिशूल तलवार धर, बघवा में चढ़ आत हें। 
सब देव छेंव ले फूल ला, गाके गुन बरसात हें। 

 शोभामोहन

४२
नवरात्रि आये दाई (ददरिया) 


नवरात्रि आये दाई, क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


जाबो महमाई सतबहिनिया के ठाँव ।
तरियापार मातादेवाला के पर लेबो पाँव।।
नवरात्रि आये दाई क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


माईघर खोली सत्ती के चँवरा ओ ओ ओ। 
कुलदेवी ला चढ़ाबो अठवई बबरा।। 
नवरात्रि आये दाई क्वाँर महीना नवरात्रि आये।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 

१४/०६/२०२२ 

४३/ बिहावगीत

कोन बारी फूलै फूल हरदी, कोन बारी फूलै फूल हरदी।
कि कोन बारी फूले दूबी घास।
कोन बारी फुलै फूल सुपारी। कोन बारी फुलै फूल सुपारी।
कि कोन बारी भिरहा के बाँस।।

ददा बारी फूलै फूल हरदी, ददा बारी फूलै फूल हरदी।
कि कका बारी फूल दूबी घास।
भइया बारी फुलै फूल सुपारी।
कि बड़ा बारी भिरहा के बाँस।।

कोन लाने खन कोड़ हरदी, कोन लाने  खन कोड़ हरदी।
कि कोन लानै फूल दूबी घास।
कोन लाने टोर के  सुपारी। कोन लाने टोर के  सुपारी।
कि कोन काटे भिरहा ले बाँस।।

ददा लाने कोड़ खन हरदी, ददा लाने कोड़  खन हरदी।
कि दाई टोरे फूल दूबी घास।
कका लाने टोर के  सुपारी। कका लाने टोर के सुपारी।
कि भाई काटे भिरहा ले बाँस।।

शोभामोहन श्रीवास्तव

४४/करमागीत छत्तीसगढ़ी

आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
ढमकढमकढम्म माँदर बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
करधन लटकन साजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
छुनुरछुनुर घुँघरूसाँटी बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
खनरखनर चूरी चूरा बाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
चंदासुरुज रूप देख लाजे।
रास राधागोपी नाचे
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
झललमलल अँचरा उड़े आजे,
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
रास राधागोपी नाचे।
माँझ पिया मोहना बिराजे।
रास राधागोपी नाचे।
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।
शोभामोहन धन्य होगे आजे।
आय रे!!! आय रे!!
रास राधागोपी नाचे।

शोभामोहन
महुदा

४५/करमागीत

गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
धिड़कधिड़क माँदर बाजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
पिंयर पिंयर लुगरा हे साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
नथली झूलझुमका हे साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे।
माँगपटिया माथ में बिराजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे
बाँह में पँहुची सुघर साजे।
गिंयागड़ी करमा नाचे।
हाय रे!!! हाय!!!! रे


४६/छत्तीसगढ़ी फाग लोकगीत

रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
बरसाना बृसभानु दुलारी, रंग जाबे।
बरसाना बृसभानु दुलारी, रंग जाबे।।
होरियारा टोली बीच कोन ढंग जाबे।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।
चोली रँगही चुनर रँगही रँगही लँहगा गोरी।
फागुन में फगुनाये टोली
गिंजरत कोरी कोरी।।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।

ग्वाला करिया रंग धरे हें,
कृष्ण धरे पिचकारी।
रंग गुलाल उड़ावत सरभर,
डउका डउकी सारी।
रंग जाबे रंग जाबे रंग जाबे।
गोरी होरी माते ब्रज रंग  जाबे ।।२
झन जाबे झन जाबे झन जाबे, गोरी होरी माते ब्रज रंग जाबे।


४७/
आमा डुमर डारी, कटवाये बन बारी।
हरियर हरियर बाँस।
बिहतरा मड़वा बेदी छवाये रुनझुन,
नेग करत ढेड़हिन हाँस।।

बेटी अउ बेटा दाई ऐके पीरा जन्माये,
बेटा ला दिये घर दुवार ।
भँवरा के धियरी ला पहिरा के पिंयरी ला,
परघर भेजत हौं हँकार।।

डोला चढ़ दुलहिन,
सुख दुख झन गिन।
जाये बर सजन दुवार।
जाये बर सजन दुवार।
बिटिया तो परधन, रीत चले चलागन,
आनेकुल करै बढ़वार।।
शोभामोहन
४८/कब सूख आथे गा भईया 


कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 

कब सूख आथे गा भईया 


जब करीया गरूवाये बादर 

छान्ही  बनके  छाथे 

जब भड़के चेर्राये भूंईया 

चोरोबोरो  नहाथे 


तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 

तब सूख आथे गा भईया 


जबर जेठ के बूॅंदाबाॅंदी 

अऊ सावन के रेला 

भादो तीजा कूॅंवरहा संेवा 

दीन देवारी मेला 




कांेईली कस गाथे गवईया 

कोईली कस गाथे गवईया 

कोईली कस गाथे गवईया 

तब सूख आथे गा भईया 


जब कोठी में धान धराथे 

आथे मूॅंह में पानी 

राजा कस जब दीखथे बेटवा 

अऊ बहूरीया रानी 


सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

सूस्ताथे कीसानीन छंईहा 

तब सूख आथे गा भईया 


४९// 

ढ़ेहहीन हाथ रंगाये बईठे 

ढ़ेड़हा गींजरत अंईठे अंईठे 

कीसम कीसम के मया सकेले 

नता जोरईया हरीयर मड़वा 


मया में माते सब ममहावत 

रंगरेली कर कर इंतरावत 

जून्ना जून्ना गंठरी छोरत 

नवा गढ़ईया हरीयर मड़वा 


एक बीरान ला अपन बनावत 

एक खून के नता तनावत 

रंगचढ़ईया हरीयर मड़वा 

नता जोरईया हरीयर मड़वा 


५०/
बना लेतेन संगी 

घर ला सपना के बना लेतेन 

थीरा लेतेन संगी 

चारपहर जऊन मेंर थीरा लेतेन 


अईसन घर जे हमर आॅंखी में झूलत हे 

आॅंखी में झूलत हे आॅंखी में झूलत हंे 

अईसन फूूल जऊन मनेमन फूलत हे 

मनेमन फूलत हे मनेमन फूलत हे 

लगा लेतेन संगी 

ऊही फूलवारी ला लगा लेतेन 

बना लेतेन संगी घर ला सपना के बना लेतेन 


रेंगरेंग धरसा में देंह जीव हा चूरत हे 

देंह जीव हा चूरत हे देंह जीव हा चूरत हे 


सपना के कूरीया ढ़ेलवानी कस घूरत हे 

ढ़ेलवानी कस घूरत ढेलवानी कस घूरत हे 

पहा लेतेन संगी 

जीनगी ला थीरथार पहा लेतेन 

बना लेतेन संगी घर ला सपना के बना लेतेन

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