Thursday, 30 November 2023

२३ से ४०छत्तीसगढ़ी लोकगीत

२३/चेतौना भजन

सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।

बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
बिन गिनहा अउ बने बिचारे। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
गोठ लबेदा सब ला मारे।। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
इही मुँह सुनता बंधवाथे। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
झगरा झाँसा इही कराथे।। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
अहमैती दमदम ले ठाढ़े। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
रीस बिया सब बात बिगाड़े।। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे। 
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
तबले सबके करत कबाड़ा।। 
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव 
मो. 91710 96 309

२४/ जीव उड़ात पिया सोरियाथे

जाय पिया कर साध उवे मन, लाग नता मन नाच नचाथे। 
सास हवै मुँहटा कर जावँव मैं कइसे बड़ जीव डराथे।
हाथ धरे ननदी बिलमा जँतली कुरिया बड़ दार दराथे। 
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओखर तो नहीं छाँव खुँदाथे।। 


बीत जथे रतिहा बिरथा दिनमान , सगा मन सीगबिगाथे। 
बाज जथे जब पैजनिया सब लोग सुने बर कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मन के तब चार मंँझार बने सहराथें। 
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा अँगरी ल उँचाथें।

जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे। 

मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर खाय ल दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी त जेठानिन पानी भराथे।। 
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२५/ गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे

कलश सजा फूलहार बनावौं।
कलश सजा फूलहार बनावौं।  
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 
पानी ओइछौं भीतर लावौं।। 

गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे। 


पंचडंडा पुर चउँक बनावौं।। 
पंचडंडा पुर चउँक बनावौं।। 
रोरीटीका माथ लगावौं।। 
रोरीटीका माथ लगावौं।। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

दीप जलावौ मंगल गावौं। 
दीप जलावौ मंगल गावौं। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
पाँव पखारौ भीतर लावौ। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309


२६/ मैं न मरौं मरही ये चोला


पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला। 


मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला। 

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।

घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।

मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२७/ छत्तीसगढ़ी दोहा


पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।। 


दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।। 

सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप। 
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।। 


उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, थकै जीव हरि छोड़ ।। 


मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घाँस। 
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२८/  कोनो न सकिन गुन गाये हो

कोनो न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

बीना बजा सरसतिया गाइन।
लिख लिख के गनपति थर्राइन।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

ध्यान लगा शिव शंकर गाइन। 
परबतिया ला कथा सुनाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।

क्षीरसिंधु सुत श्रीहरि गाइन। 
नारद गा नइ मुँह सुखाइन, फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर,

वेद लिखैया ऋखिया गाइन। 
तोर गुन गावत देह तपाइन।। 
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

२९/  छत्तीसगढ़ी सुआगीत

तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डंगाली मा सुगना तोर बासा रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहिनिया मंझनिया के संगी तहीं तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
गुर के भेला जइसे सुगना तोर बोली रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
अँगना परछी खोली बाहिर दुनिया सुवना तरी ना रे ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
सोना के पिंजरा मा जीव छटपटाथे सुआ रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309

 

३०/सुआगीत (गौरी गौरा) 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 
गौरी ला जावत बिहाये इसरदेव बम भोले।
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले। 

तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बम भोले।
गौरी गौरा ल जगाबो माटी के सुआ बोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

भूतवा परेतवा के संगी गोसैया, 
इसरदेव बम भोले। 
चंदा उजाला मुड़ बिखहर माला, 
छबि ला देख मन डोले। 
तरी नारी नाना मोर नाना रे नाना, 
इसरदेव बमभोले। 

शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़


३१/जोगनी बरत बन जोत, दाई मोर।

जोगनी बरत बन जोत। 


सुरुज उतारत तोर आरती, 

बड़े बिहिनिया होत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत। 


चंदा चंदैनी लुगरा ढ़ींक में,

अपन अंजोर कुढ़ोत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत।


तोर दरस अतका पबरित हे, 

मन के केरवछ धोत।

दाई मोर जोगनी बरत बन जोत।


शोभामोहन श्रीवास्तव 



३२/भवानी भजन


आये ओ दाई अँगना में मोर


नौ दिन बर भेज के तोला। 

किरपा करे हे भोला।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


भोले शंकर के प्यारी। 

हे गनपति के महतारी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर।


कैलाश के हे महारानी। 

हे दुर्गा आदि भवानी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर। 


हे शक्ति के अवतारी। 

महिमा हे तोर बड़ भारी।। 

आये ओ दाई अँगना में मोर।


शोभामोहन के दाई। 

सबदिन तैं हवस सहाई।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


नौ दिन बर भेज के तोला। 

किरपा करे हे भोला।।

आये ओ दाई अँगना में मोर।


शोभामोहन श्रीवास्तव शुभचन्द्रसूर्या 

३३/जगमग दियना जलाये 


नौ दिन अउ नौ रात भगत मन, 

जगमग दियना जलाये हो, 

माई मोरे


तोर मया के अँचरा लहरिया, 

लहर लहर लहराये हो, 

माई मोरे। 


तोर कर्म गुनगान करत जन,

ऊँचहर सुख सब पाये हो, 

माई मोरे। 


रूप अनेक धरे जगतारन, 

गुन बरने नहीं जाये हो, 

माई मोरे।


तैं भगतन के आस पुरैया, 

सरनागत के सहाई हो, 

माई मोरे ।


३४/तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार


तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।

बीच में हावय तोर रचे अउ, माया के संसार।।

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


तोर लइका तोला सँउरत हावय।

तन झुमरत मन मउरत हावय।। 

पाके मया दुलार।।२

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


दुख देथे जब कर्म के भँउरी। 

गिरथे मनखे तोरेच पँउरी।।

पार के तोला गोहार।। 

तहीं हवस ये पार ओ दाई तहीं हवस ओ पार।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३५/चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


धरो फीता चुरिया सेंदुर टिकुलिया।। 

भेट बर झलमल लाल चुनरिया। 

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


चलो चलो दुखिया, चलो चलो सुखिया।। 

छाँव थिराये दाई अँचरा लहरिया। 

चलो जाबो चलो जाबो, दाई के दुअरिया।

चलो नेवरात में चढ़बो, पहड़िया।।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३६/उतारै तोरे आरती 


ब्रम्हा जगसृजनकारी।उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


विष्णु जगपालनहारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


त्रिपुरारि शिव संहारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


ब्रम्हाणी रूद्राणी उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


बैकुंठ के महारानी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


चंदा चाँदी के साज थारी। उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती। 


सुरुज करके उजियारी।उतारै मैया आरती। 

भवानी मैया आरती हो, महामाई मैया आरती।


शोभामोहन श्रीवास्तव 


३७/महाकली सुमरनी(ताटंक छंद)


कलकल-कलकल कलकलात हे, कालरूप कंकाली हा । 

रखमख-रखमख जावत हावै, बिकटरूप बिकराली हा ।।


खरखर-खरखर रक्सा तीरत, भंडारे बर आये हे। 

मूठा भर चुंदी ला धरके, आँखी ला छटकाये हे।।


लपलप-लपलप जीभ निकाले, भड़के भँव ल चढ़ाये हे। 

बेनी छोरे छरियाये हे, मुंडमाल गर नाये हे ।


३८/भगवती सेवाभजन 


लाला लाला लाला लाला लाला, लालालालालाल 


गढ़े कुम्हारे जब माटी के करसा, जब माटी के करसा। 

तेली हर पेरे हे तेल। 

वैश्या घर के माँझा अँगना माटी, माँझा अँगना माटी।  

कोड़े खन के लाने सकेल।। 


कोष्टा काते हे जब सूत कुँवारी, मैया सूत कुँवारी।

माली बगैचा लाने फूल। 

पटवा घर के चूरी सेंदुर दाई, चूरी सेंदुर दाई।

बैगा झूपै झूल झूल।। 


बनिया घर के दाई हरदी सुपारी, दाई हरदी सुपारी। 

दर्जी सिले धज लाल। 

बारी मरारिन टोरि लिमुवा लाने, जब बोंये हे लिमुवा।। 

गढ़े कसेर काँस थाल।। 


गढ़े तमेरा जब तामी के लोटा, जब तामी के लोटा। 

गढ़े सोनार सोन हार। 

बढ़ई बनाये हे जब आसन पाटा, मैया आसनी पाटा। 

बाना ला बनाये लोहार। 


नाउन लाने जब सील के पतरी, हो मैया सील के पतरी। 

गुनपोथी पढ़े महराज। 

सब मिलके जब नेवरात जगाये, हाँ नवरात जगाये।

जरियाये हे समाज।। 


कोन बिगाड़े तोर लइका के सुनता, दाई लइका के सुनता।

कोने आपस झगरात। 

वामपंथ के फन बिखहर दाई, हे फन बिखहर दाई। 

फूलवरिया अगन लगात।। 


जात धरम के बड़ झगरा हे माते, मैया झगरा माते। 

मनखे हे लहू बोहात।। 

बाट देखा दे दाई शुभ अउ सत के, दाई शुग अउ सत के। 

मनखे जीये ल भुलात।। 


शोभामोहन श्रीवास्तव 

११/१०/२०२१

३९/जयजय शैलकुमारी जयजय


जयजय शैलकुमारी जयजय।
जयजय जगहितकारी जयजय।

जयजय परमउदारी जयजय। 
सकलभुवनउजियारी जयजय। 


संत सुजन सुखकारी जयजय
दुष्टदलन करतारी जयजय।।

शंकरसदन सुआरी जयजय।
जय गणपतिमहतारी जयजय। 

आँखी छटकत कारी जयजय।
जयजय खप्परधारी जयजय।। 

जयजय शेरसवारी जयजय।
अजगुतछवि मनोहारी जयजय।। 


शोभामोहन

४०/तोला मनाये बर जँवारा जागेंव(ददरिया) 


मैं जँवारा जागेंव आदि भवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।


सोने के कलसा आमा के पाना ओ ओ ओ।

सुमिरत हौं भवानी मोर घर  आना।।

मैं जँवारा जागेंव आदिभवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।


दीया अउ बाती करत हे अंजोर ओ ओ ओ ।

महमाया शीतला सुन अरजी ला मोर ओ। 


मैं जँवारा जागेंव आदिभवानी मोर। 

तोला मनाये बर जँवारा जागेंव।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

१४/०६ /२०२२ महुदा 

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