Friday, 12 September 2025


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डुँहड़ू मन हर फूल बनत हे, मौसम हर पगलागे हे।
गाँव गिंजर बारा महीना में, फेर बसंती आगे हे।

साध सधौरा के डारी मन, ड़ुहड़ागे डँड़ियागे हे।

चंदा आय नहाये तरिया, संग चँदैनी भागे हे।

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