Tuesday, 16 September 2025

महल सुहावन लागे नगर सुहावन लागे

महल सुहावन लागे हो, नगर सुहावन लागे ।
दुलही दुलारी के मड़वा, गजगजावन लागे।।
करसा के पानी में हरदी भिंजोये।
हरदी कुचर पीस पीस तेल मोये।।
गोबर लिपावत मड़वा, चउँक पुरावन लागे।
मोती झालर खाल्हे आमा के डारी।
अँचरा देवत काकी बड़ी महतारी।।
दाई माई मन खाल्हे मड़वा, आँसू बोहावन लागे।

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