Sunday, 8 June 2025

भुजङ्गविजृम्भित छन्द (पिंगल)

भुजङ्गविजृम्भित छन्द (पिंगल)

उत्ती मूड़ा लाली छाये, चमचम चमचम चमके, दिनकर संग में।
जागे चारा खोजे भागे, दरबर चुरगुन पँड़की,
उपबन लंग में ।।
कोठा ढीले भैया गैया, दँउड़त दँउड़त खरिखा,
गदबिद जाय हो ।
बेरा होगे जागे के रे, चल अब उठ उठ मनखे,
करमजागौ जा जगाय हो ।। 

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