शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ी लोकगीत
१
दंदरत बिरहिन दुखियारी
(बिरहा गीत)
घन घपटत घटा घनन घनन घन,
घन घपटत घटा घनन घनन घन,
बादर गरजत बड़ भारी।
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बनठन ठनगन कर मनमाने मन,
बोंवत घनसुख के क्याँरी।।
जल बरसत हे झरझर झरझर,
जल बरसत हे झरझर झरझर,
छमछम ठमकत रुख डारी।
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
तड़तड़ तड़तड़ चमकत बिजली,
गड़गड़ गड़ मेघा मतवारी।।
सरसर सरसर जब पवन करत,
सरसर सरसर जब पवन करत,
फरफर फहरत हे साड़ी।
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
धड़धड़ धड़धड़ धड़कत छाती,
दंदरत बिरहिन दुखियारी।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
२
कमल फूल तरिया फुलगे राजा
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे।
आमा हा फुलगे अउ परसा हा फुलगे।
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
अमली फुलगे बगैचा गमक घुलगे।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
आँसू ले सेजरिया फुलगे राजा।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे।
मोंगरा हा फुलगे चमेली हा फुलगे।
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।।
बेला के डारी लहसगे अउ झुलगे।।
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा।
आँखी ले आँसू हा ढुलगे राजा।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
सरसों हा फुलगे अउ काँसी हा फुलगे।
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे।
बारा बछर के सब बंधना हा खुलगे।
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा।
गौंतरिहा आये दुख भुलगे राजा।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
कमल फूल तरिया फुलगे राजा।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़ मो. 91710 96 309
३
सिंगार लोकगीत (दादरा)
साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।।
साज डरेंव सोलहो सिंगरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।।
लाली के पहिरेंव लुगरिया, सजन चल किजरन जाबो हो।
लाली के पहिरेंव लुगरिया, पहिन चल किजरन जाबो हो।
चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
चाँदी के ऐंठी संग लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया।
लाली के चुरिया हाँ लाली के चुरिया।
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।।
पाँवे मा लिखेंव महुरिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो।।
सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया।
सोने के सूता सुर्रा माला रुपिया।
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया।
सुर्रा माला रुपिया सुर्रा माला रुपिया।
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो ।
कनिहा कसेंव करधनिया, सजन चल गिंजरन जाबो हो ।
बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
बिछिया चुटकी संग छुन छुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया।
छुनछुन पैजनिया हाँ छुनछुन पैजनिया।
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।
झुमका झकास झूल नथनिया, पहिनेंव चल गिंजरन जाबो हो।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
मो. 91710 96 309
४ चेतौना भजन
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उलाना रे ।
बिन गिनहा अउ बने बिचारे।
बिन गिनहा अउ बने बिचारे।
गोठ लबेदा सब ला मारे।।
गोठ लबेदा सब ला मारे।।
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे।
पाँछू मन मन में गुन गुन परगे पछताना रे।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
इही मुँह सुनता बंधवाथे।
इही मुँह सुनता बंधवाथे।
झगरा झाँसा इही कराथे।।
झगरा झाँसा इही कराथे।।
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे।
परछो पाये बर हे तौ बोली अजमा ना रे।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
अहमैती दमदम ले ठाढ़े।
अहमैती दमदम ले ठाढ़े।
रीस बिया सब बात बिगाड़े।।
रीस बिया सब बात बिगाड़े।।
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे।
घोर सुघर मधुरस बोली जग अपन बना ना रे।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
जीभ हमर हावय बिन हाड़ा।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
तबले सबके करत कबाड़ा।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
चेत बुध उजराये सरलग हरि गुन गा ना रे।।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
सोच समझ के गोठियाये बर मुँह उला ना रे ।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
मो. 91710 96 309
५ जीव उड़ात पिया सोरियाथे
जाय पिया कर साध उवे मन, लाग नता मन नाच नचाथे।
सास हवै मुँहटा कर जावँव मैं कइसे बड़ जीव डराथे।
हाथ धरे ननदी बिलमा जँतली कुरिया बड़ दार दराथे।
जेकर नाम हवै जिनगी हर ओखर तो नहीं छाँव खुँदाथे।।
बीत जथे रतिहा बिरथा दिनमान , सगा मन सीगबिगाथे।
बाज जथे जब पैजनिया सब लोग सुने बर कान लगाथें।
मैं चलथौं उँकरे मन के तब चार मंँझार बने सहराथें।
जाँव कहूँ अपने मन के तब दोस लगा अँगरी ल उँचाथें।
जान सकौं न पिया मन बात भले कतकोन गड़ी अँखियाथे।
मोर कभू मरुवा धरथे तब देवर खाय ल दे कहि आथे।
जेठ कथे चल खेत कती डिंगरी त जेठानिन पानी भराथे।।
मोर मती छरियात सबो अउ जीव उड़ात पिया सोरियाथे।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
६ गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे
कलश सजा फूलहार बनावौं।
कलश सजा फूलहार बनावौं।
पानी ओइछौं भीतर लावौं।।
पानी ओइछौं भीतर लावौं।।
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे।
गौंतरिहा मोर घर बहुरे हे।
पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।।
पंच डंडा पुर चउँक बनावौं।।
रोरी टीका माथ लगावौं।।
रोरी टीका माथ लगावौं।।
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे।
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे।
दीप जलावौ मंगल गावौं।
दीप जलावौ मंगल गावौं।
पाँव पखारौ भीतर लावौ।
पाँव पखारौ भीतर लावौ।
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे।
गौंतरिहा पिया घर बहुरे हे।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
७ मैं न मरौं मरही ये चोला
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
पाँचजिनिस छिनभंगुर तनधर,उतरे भुँइया डोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला।
आये हौं चौरासी चक्कर, काटे बर जग टोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
ऋखि मुनि तरगें संत तरगें, अँवतर धरती गोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
घाट घाट के पानी पीके, आज बतावौ तोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
मैं न मरौं मरही ये चोला।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
८ छत्तीसगढ़ी दोहा
पाँच जिनिस के कुन्दरा, सुगना तोर बसेर।
पाप पुण्य जाने बिगन, लाहो लेथस फेर।।
दू दिन के बरसात में, टोरत हस तैं पार।
का सिखही जग तोर ले, नदिया चिटिक बिचार।।
सरवर में हंसा बुड़े, बुड़े समुन्दर सीप।
गुहलेदा माछी बुड़े, संसो बुड़े महीप।।
उड़ उड़ के पंछी थकै, कुकरी भुँइया कोड़।
आशा तिसना नइ थकै, जीव थकै मूड़ छोड़ ।।
मोती ला हंसा चरै, चरै गाय हर घास।
लालच बुद्धि ला चरै, मन ला संसो फाँस।।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
९ कोनो न सकिन गुन गाये हो
कोनो न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो।
बीना बजा सरसतिया गाइन।
लिख लिख के गनपति थर्राइन।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।
ध्यान लगा शिव शंकर गाइन।
परबतिया ला कथा सुनाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिस गुन गाये हो।
क्षीरसिंधु सुत श्रीहरि गाइन।
नारद गा नइ मुँह सुखाइन, फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर,
वेद लिखैया ऋखिया गाइन।
तोर गुन गावत देह तपाइन।।
फेर न सकिन गुन गाये प्रभु तोर, कोनो न सकिन गुन गाये हो।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
१० छत्तीसगढ़ी सुआगीत
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
घर के पिछोती में आमा के रुखवा रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
तेकर डंगाली मा सुगना तोर बासा रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
संझा बिहिनिया मंझनिया के संगी तहीं तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
गुर के भेला जइसे सुगना तोर बोली रे तरी नारी ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
अँगना परछी खोली बाहिर दुनिया सुवना तरी ना रे ना।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
सोना के पिंजरा मा जीव छटपटाथे सुआ रे तरी नारी ना।।
तरी ना रे नाना मोर नाना रे नाना रे सुआ ना रे।
तरी नारी नाना रे ना।
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
११ सुआगीत
शुभ चन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छत्तीसगढ़
मों 9171096309
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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