धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल
परमदेव भुँइया ला करत हे निहाल।
सायर कस धुन धुन के नत्ता निकाल।।
तरिया तोपत छछले पुरइन के पान।
डुहड़ू चरचर ले दिखत लोभलोभान।।
घमघम ले बर पीपर ताने तिरपाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
ड़ोंगर ले पझरत रस अमरित के धार।
रुखराई फर फुलके पोसत संसार।।
छलकत ढ़ोड़गी नदिया डबरी अउ ताल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
कठल-कठल के हाँसत मोहाये डार।।
दे पराग मेर ओंड़ा भौंरा मतवार।
निरघट चूमत हे कुमुदिनी के भाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
रजनीगंधा गमकत महर महर रात।
झाँय-झाँय झिगुर मन करत गोठ बात।।
तरिया में चंदा के झिलमिल भोकाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
लहसत रुखवा डहर डारा हिलोर।
भेंटत जोहारत हे चकवी चकोर।।
दँउड़त बन हिरनी हर मारत उझाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
लकरधकर बेरा सुखरतिहा पहात।
सोनहा मछरिया के सेसरा निछात।।
धेनु चराये बर सँभरत गोपाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
मिरगापानी पीके पनकत पियास।
उसनिंदा रतिहा ला अँखरत उजास।।
सुरुज आरो लेवत जगत हालचाल ।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
शोभामोहन
परमदेव भुँइया ला करत हे निहाल।
सायर कस धुन धुन के नत्ता निकाल।।
तरिया तोपत छछले पुरइन के पान।
डुहड़ू चरचर ले दिखत लोभलोभान।।
घमघम ले बर पीपर ताने तिरपाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
ड़ोंगर ले पझरत रस अमरित के धार।
रुखराई फर फुलके पोसत संसार।।
छलकत ढ़ोड़गी नदिया डबरी अउ ताल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
कठल-कठल के हाँसत मोहाये डार।।
दे पराग मेर ओंड़ा भौंरा मतवार।
निरघट चूमत हे कुमुदिनी के भाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
रजनीगंधा गमकत महर महर रात।
झाँय-झाँय झिगुर मन करत गोठ बात।।
तरिया में चंदा के झिलमिल भोकाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
लहसत रुखवा डहर डारा हिलोर।
भेंटत जोहारत हे चकवी चकोर।।
दँउड़त बन हिरनी हर मारत उझाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
लकरधकर बेरा सुखरतिहा पहात।
सोनहा मछरिया के सेसरा निछात।।
धेनु चराये बर सँभरत गोपाल।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
मिरगापानी पीके पनकत पियास।
उसनिंदा रतिहा ला अँखरत उजास।।
सुरुज आरो लेवत जगत हालचाल ।
धोवत हे ओसबूँद कमलफूल गाल।।
शोभामोहन
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