Tuesday, 21 March 2023

देशभक्ति समसामयिक रचना

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।



भारत से प्यारा जिनको  पाकिस्तान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


रोना गरीबी का रोते दिन रात। 

बढ़ती जनसंख्या पर करते ना बात।। 

भारत की गरिमा का जिनको ना ध्यान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


बेरोजगारी का गाते जो गीत। 

मुफतखोरी की भाती जिनको रीत।। 

अकबर बाबर को बताते महान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


श्रद्धा के टुकड़े करता आफताब। 

हत्याओं पर चुप्पी लगती खराब।। 

ताले जड़े जिनकी जिनकी जुबान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


करते हैं लोगों को जो इस्तेमाल।

अब उनकी गलने न पायेगी दाल।। 

भूले जो अपने पुरखों की पहचान। 

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


चूहा बन खोदें जो घर की दीवार। 

भारत के दुश्मन लगते जिनके यार।। 

भारत का खाते गाते पाकिस्तान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


कानूनों से जो हैं करते खिलवाड़। 

उनके धन दौलत को करने कबाड़।। 

बुलडोजर चलाने उनके मकान।।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।


आपस में मिलजुल रहो सारे लोग। 

मिट पायेगा तब भयंकर यह रोग।। 

कट्टरता सिखलाने खोले दुकान।

ऐसे लोगों की कर अब लो पहचान।




शोभामोहन श्रीवास्तव 

१५/१२/२०२२



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