दसपदी राम स्तुति
चरण कमल रघुनायक, सुखदायक है।
नख शिख रुचिर ललाम जय जय राम लला।।१।।
सुर नर ऋषि मुनि पूजत, सुख लेवत है।
शरण तरण भव पार, जय जय राम लला।।२।।
अटल अमल जगवंदित, विधि रंजित हे।
प्रबल सबल अविकार जय जय राम लला।३।।
धरम-करम शुभ धारक, अरि घालक हे।
अखिल भुवन करतार जय जय राम लला।।४।।
भजन विरत बिसरे तन, जन संतन हे।
नवल धवल भर भाव, जय जय राम लला।।५।।
मुकुट वसन अति सुंदर हे, मणि मंदिर हे।
करषत लटकत हार, जय जय राम लला।।६।।
झनक कनक मणि करधनी, ध्वनि मोहक हे।
जय जय अवध भुवाल जय जय राम लला।।७।।
तरुण अरुण पद कोमल,धुति उज्जवल हे।
जय जय नयन विशाल, जय जय राम लला।।८।।
शशि सम मुखमणि उज्जवल, बाहू बल है।
जय जय उर वनमाल जय जय राम लला।।९।।
दसन वसन रविमंड़ित, जगपंड़ित हे।
तिलक रघुकुल भाल, जय जय राम लला।।१०।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२८/०८/२०२२
शुभस्थान-महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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