Tuesday, 21 March 2023

कृष्ण भगवान के भजन पुस्तक

कृष्ण भगवान के जीवन चरित्र








१.जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।
तीनो तिलिक गुसैया जयजय।। 

गोकुलधाम रहैया जयजय ।
जसुमति के लरिकैया जयजय।।
नंद हृदय हरसैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

राधा नामरटैया जयजय।
बंधनजगत कटैया जयजय ।।
मधुबन रासरचैया जयजय ।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




मन अंँधियारहरैया जयजय ।
अजगुत करमकरैया जयजय।।
बन-बन धेनुचरैया जयजय।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

इन्दर तापनवैया जयजय।।
माखन लूटखवैया जयजय।
अंँगुरी छत्रछवैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

चंदनतिलक लगैया जयजय।
पाग पिरितपगैया जयजय।।
अंतस भावजगैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 



धर्मध्वजा फहरैया जयजय।
संत हृदय सहरैया जयजय।।
ब्रजभुँइया लहरैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

जयजय धरमथपैया जयजय। ।
जयजय करमथपैया जयजय। 
बलदाऊ के भैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

कालीनागनथैया जयजय।
गीता के अरथैया जयजय।।
जयजय कामलजैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




कृष्णा लाजबचैया जयजय।।
अजगुत सृष्टिरचैया जयजय।।
अधरम संग लड़ैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

बिखहर नागनथैया जयजय ।
अगम अपार अथैया जयजय।।
अनगिन रूपबनैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

गीताज्ञान सुनैया जयजय।
जीव उपकारगुनैया जयजय।।
जय सारथी बनैया जयजय। 
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 




सुंदर सृष्टिसजैया जयजय।
बंशी मधुर बजैया जयजय।।
अनगिन खेलरचैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

जयजय चक्रचलैया जयजय। 
छाती दुष्टछलैया जयजय।।
जम्मो जगतपलैया जयजय।। 

रक्सा मारसुतैया जयजय।।
बैरी नामबुतैया जयजय।।
सबले बड़ेलड़ैया जयजय।।
जयजय कृष्णकन्हैया जयजय।। 

शोभामोहन श्रीवास्तव







२. नंद दसोदा अँगना सुख बरसात है 

१.
घनश्याम रूपधाम कोटिकाम धर नाम,
अनगिन खेल ब्रजभूमि में दिखात है ।
इतरात छिप जातमुसकात मुच मुच,
नंद जसुदा अँगना सुख बरसात है।। 
दँउरत हँफरत भँवरत ब्रज भर, 
नखरा देखात गोप ग्वाल ला रिझात है।
तनसूखा मनसूखा धर के दही चोरात, 
चोरहा ले घलो महाचोरहा कहात हे,





२.


रतजाग अनुराग धनभाग बिरिज के,
देख देख सरग देवता ललचात है॥
नहवात खोरवात फूल हरि ला चढ़ात, 
बिंजन बनात हे कुलक के जेंवात हे।।
प्रीत घोर हाथ जोर रेंगत जे थोर थोर, 
तेने जीव जग ले सहज दुरिहात हे। 
वो चरण वो शरण रहि के शोभामोहन, 
सतलोक के सुख ला धरती में पात हे।।  


शोभामोहन 





















३. भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के

भजन कर मन बिरिजपति श्री श्याम के। 
ब्यापही नइ दुख सरद अउ घाम के।।  

ये जगत में लाग नत्ता कोन हे। 
बड़ अकेल्ला ये परेवना सोन हे।।
चाकरी अब छोड़ धन अउ धाम के।। 
भजन कर मन बिरिज पति........

डार रटहा बने कुँदरा तोर हे। 
साँवरे के हाथ जिनगी डोर हे।। 
झन बहाना कर तैं बूता काम के। 
भजन कर मन बिरिजपति....

शोभामोहन श्रीवास्तव 


४. मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे
 

हरि के बनाय देह,हरि के जगत गेह।
हरि के पदारथ ला हरि ला चढ़ाय रे।
हरि जगसुख सोती,हरि जग जीव जोती।
मृणमय चिनमय हरि सिरजाय रे।
हरि ले मिलन बर, भज सुमिरन कर।
हरिच के अंश जीव हरि में समाय रे। 
एको छिन गँवा झन, मया गढ़ा मने मन। 
जग जब मनखे के चोला धर आय रे।  

शोभामोहन 







तोर हाड़ा हपट के जोरे सब चीज बस, 
नाशवान तभो ले हवस बइहाय रे। 
गजब डउल कर फुनगी मा पहुँचेस, 
खसले के डर फेर जीव में समाय रे। 
रचेस सजन संग मिलन जुलन खेल, 
मिलन के संग फेर बिरहा लिखाय रे।
चटक-मटक चरदिनिया जिनिस बर, 
ओंड़ा दे तैं हरिनाम रहे बिसराये रे।  

शोभामोहन 




५. मोहना तोर मुरली टोना भरे  

मोहना तोर मुरली टोना भरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
धुन सुन के बछरु गैया चरे।
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।।  

सुन रुखराई फहर फहरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
बिगन सुने धुन कल नइ परे।
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  

सुन जमुनाजल लहर लहरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  
ग्वालिन के ये करेजा कतरे। 
मोहना तोर मुरली टोना भरे।।  

शोभामोहन


६. सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन। 

सुन्ना गली अउ गाँव, सुन्ना हे कदम छाँव, 
सुन्ना नंद के महल  बिरिज अंजोर बिन। 
सुन्ना जमुना के घाट, सुन्ना हे बजार हाट, 
सुन्ना-सुन्ना नैन रैन नंद के किशोर बिन। 
सुन्ना अमरइया हे, सुन्ना सेज शय्या हे। 
सुन्ना हे बिरिज बन नंदलाला सोर बिन। 
सुन्ना कोठा चुप धेनु, ब्रज बिन ध्वनि बेनु, 
सुन्ना संझा मँझनिया सुन्ना अउ भोर हे।।  

शोभामोहन 





७. हरि बोल रसना 

माया के नगरिया फोकट झन फँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
मोह ममता के गरी नरी झन कस ना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
अँगरी उँचा कहूँ न कहूँ झन हँसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
मन मा सुरुज उवा घरिया के दसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
जतका दिन लिखाये इहाँ तोर बसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 
शोभामोहन भेड़ी धसान झन धसना।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल रसना।। 

शोभामोहन


८.नंदलाल खेलत होरी(राग हिंडोल वसंत)  

उड़त गुलाल गली गोकुल के,
नंदलाल खेलत होरी।
नंगत हे हुड़दंग मचावत,
रंगत नंगत सब गोरी।। 

बचत बचत दँउड़त हे गुवालिन,
रंग बरसत सब ओरी।
गाल गुलाल गुवाल लगावत,
दल बल टोली जोरी।। 

बाजत माँदर नाल नगाड़ा,
रस रंग रंजक बोरी।
बुढ़ुवा बाल जवान जमोझन,
लानत हे रंग घोरी।। 

धरनी में सुख परम अलौकिक,
लूटत बिरिज किशोरी।।
शोभामोहन के गोसैया,
करत जबर बरजोरी।। 

शोभामोहन












९.
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के, सिंगार फगुनवा हे


सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।

मूड़ मटुकिया लटक फगुनवा।
कदकाछनी रंगचटक फगुनवा।
बैन-नैन के मटक फगुनवा।
मूड़ में पीक मँजूर कुंडल,
गरहार फगुनवा हे।।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।

माथा खउरा चंदन फगुनवा।
पागा पागी बदन फगुनवा।
नंदनंदन सुखसदन फगुनवा।
मोती मणि माणिकमाला,
उजियार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।। 

चोली चुंदरी रंग फगुनवा।
गाँठ बँधाये संग फगुनवा।
झुमका झूल मलंग फगुनवा।
रुनुक झुनुक पैजन चूरी,
झनकार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।। 

ढोल नगाड़ा थाप फगुनवा।
भुँइया देत अलाप फगुनवा।।
पिया पिया के जाप फगुनवा।।
रंगत रंग ब्रज अपन संग,
सरकार फगुनवा हे।।
शोभामोहन जिनगीधन,
करतार फगुनवा हे।
ब्रजकिशोर वृषभानुलली के,
सिंगार फगुनवा हे।
सिंगार फगुनवा जुगल छबि के,
सिंगार फगुनवा हे।।

शोभामोहन



१०. तेमा सुते ललना 

सोनहा महलिया के सोनहा अटरिया मा,
सोनहा मियार मा बँधाये हावै पलना।
सोनहा थाम्हन खंभा सोनहा जबर दासा,
सोनहा ड़ाँड़ी पटनी पाटे सोन बल ना।
सोनहा सँकरी कड़ी दिये हे झुलाये बर,
सोनहा बेलबूटा किनारी छेंका छलना।
सोनजड़ी फुँदना के दसे छतरँगिया हे,
सेम्हर गदिया दसे तेमा सुते ललना।
सोनहा बेरा घड़ी हे सोनहा हे अवसर,
सोनहा चँवर दाई झालत हे झलना।
सोनहा सुअवसर पाये तै शोभामोहन,
नाम गुन गाये बर चिटकोन हल ना।। 





फूल झेला नंदलाल, ब्रज नैन उजियाल,
फूल के हिंडोलना दाई सुतात ललना ।
दुलरुवा गोप ग्वाल, देख होत हें निहाल,
खेलत पटक गोड़ झुलना उझलना।
फूल के चँवर झाल, जसुदा छूवत गाल,
गम न मिलत बेरा दिन रात ढ़लना।
लीला करे बर बाल, दुष्टन के बन काल,
शोभामोहन के स्वामी आये हे भूतल ना । 

शोभामोहन







अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

माया खूँटी, उसलै झूठी, दे दे बूटी, मन सोझियाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

नावा जुन्ना, नत्ता दुन्ना, अउ मन उन्ना, निचट झँवाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

सब दिन राती, आती जाती, सुमरन थाती, असन जनाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

आनी बानी, बाट बेंझानी, गोड़ अड़ानी, झन दुःख पाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

साध जगा मन, शोभामोहन, अधम उधारन,अरज लगाय।
अब आजा लहरिया, लगन धरवाय। 

शोभामोहन



मणि जड़ाय सोन थार,दियना रिगबिग मँझार।
मंगल करसा सँवार, धर धर नर नारी।
मन हुलास बहत धार, बोलत जय बार बार,
रंग रंग के कर सिंगार, खड़े हें दुवारी।।
घंटा घन घनन घोर, झालर झन झन झकोर,
सुन भीजत पोर पोर, गदगद हिय भारी।।
दमउ दफड़ा दमोर, छन्न छन्न छन्न शोर,
भँवरत माते विभोर, कुलक जात वारी।।
चूमत निच्चट निहार, गिंधिया गिंधिया दुलार, 
शोभामोहन अधार, जनमे बनवारी। 

शोभामोहन श्रीवास्तव



बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

अठतल्लागढ़ महल अटारी,
ईश चलात अटाला। 
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

पहिलीतल्ला रूप विषय के,
मोती अउ मणिमाला।
दूसर तल्ला धन दौलत के,
छाये मेकरजाला।।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

तीसरतल्ला पद गरिमा दे,
गोभत गरब के भाला।।
चौथातल्ला सुखप्रद अन्नो,
सुख बगराने वाला।
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

पंचमतल्ला निर्मल हिरदे,
हे बरसात सुधा ला।
छट्टमतल्ला राखे रिधिसिधि,
जोग भठाये चाला।
बइठे ऊपर तल्ला माया रचत निराला । 

सप्तमतल्ला दिव्यज्योति के,
चारोखुँट उजियाला।
शोभामोहन आठवाँतल्ला,
जाये कर जोरा ला। 
बइठे ऊपरतल्ला माया रचत निराला । 

शोभामोहन श्रीवास्तव


गर बनमाल सजैया खोजौं ।
चंदन तिलक लगैया खोजौं।। 

दसमत फूल खोचैया खोजौं ।
महर महर ममहैया खोजौं । 

बन बन धेनु चरैया खोजौं।
मधुबन रास रचैया खोजौं ।। 

गगरी फोर लुकैया खोजौं ।
गोपी नाच नचैया खोजौं ।। 

ग्वालिन चीर चुरैया खोजौं ।
मोहनकिशन कन्हैया खोजौ।। 

बंशी मधुर बजैया खोजौं ।
पाँख मँजूर लगैया खोजौं।


करत हवय चुलकाय असन

हलन चलन माते कस झुमरत,
ठिठकन तक बउराय असन ।

तोर बिगन ए कंचन काया
रहय पिया अइलाय असन ।

सब पीरा के मान होत हे ,
लागत नही पिराय असन ।

हाथ धरे हस जब्बर तँय हा ,
दुनिया करय गिराय असन ।।

हाँसे थूँके चाल चलन ला
होवत जमो थिराय असन ।

मन के भाव मा पाला परगे ।
होगे चेत हराय असन ।

कोंवर भाव मा करा गिरत हे,
छाती लगत चिराय असन ।

चमकत सुकुवा बेर पहाती,
बेरा घुँचत बताय असन।

सेंदुर लगे बिहिनिया सँझा,
करत हवँय चुलकाय असन।

नरी रुँधागे अब का बोलँव,
सुध करत हुरियाय असन।

मन में संसो सँचरत सरभर
जिनगी सासँ हराय असन ।।

शोभामोहन श्रीवास्तव 

जयकारी छंद 

बिरहिन राधा के गोहार

अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया। 

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे। 
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।। 
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया। 

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया। 

शोभामोहन


कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै 

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।। 
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

रहि रहि बादर बिजली चमके। 
मन डर्राये बिगन सजन के।। 
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

मन चुलहा मा धधकत आगी । 
आके जीव कर दे बड़भागी।। 
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

शोभामोहन 



बिरहिन राधा गोहार

कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।

कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।। 
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।। 
काला करलई कहौं मनबसिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना। 
उड़त अगास देख पंछी परेवना।। 
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

शोभामोहन


गिंया-गड़ी गीत

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।। 
जानथस का बता मोर तो बाली उमर, 
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे। 

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं। 
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे। 
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया। 
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

कइसे काला कहौं रात के बात ला, 
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन, 
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै, 
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन, 
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर, 
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले, 
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

शोभामोहन 


आँखी खोजत माखनचोर

गुड़ी करत हे चारी मोर। 
पूछत हे महतारी मोर।। 
घेरीबेरी ओखी जोर, 
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।। 
दिखत नइ हे ओकर छाँव। 
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।। 
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।। 
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन 

झन तो बरस अतका रे बादर

झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-डबरी मिलन करत अउ, 
नदिया समुन्द समागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

घोपेघटा मयूरा नाचत,
रुख में लता लपटागे। 
मंदबयार उड़ावत अँचरा,
बिरहिन मन दुखछागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

जइसे-तइसे बेर कटत अउ, 
रतिया फाँस धँसागे।
दसदिश ये मन जेला खोजत, 
बहुरन बाट भुलागे ।।
झन तो बरस अतका रे बादर

शोभामोहन 




तलफत मन हर, तोर दरसन बर, 
 बही भुतही असन। 

बिरहिन राधा के गोहार

अब तो जिये नइ जावै तोर बिन करिया। 

बिरहाअगन बर सतीगति पाहूँ रे। 
फेर तनधर तीनोंतिलिक न आहूँ रे।। 
पावन सावन कहूँ रहिहौं परिया।
अब तो रहे नइ जावै तोर बिन करिया। 

कोन ला धरौं बता तो, बिरहा के साखी रे।
कोन ला देखावौं मोर हिरदे के फाँकी रे।।
सुध के कमल फूले आँखी तरिया।
अब तो रहे न जाय तोर बिन करिया। 

शोभामोहन


कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै 

झिमिर झिमिर बरसत बादर।
आँखी आस धराथस काबर।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

कुलकत हाँसत गोकुल गोरी।
जेकर संगी जाँवर जोड़ी।।
मोला मार के ताना कुड़कावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

गरजत घुमरत बरसत बदरा।
फीजत चुनरी टपकत अँचरा।।
बूँद परै तन जीव दहकावै।।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

पढ़के मोर मया संदेसिया ।
अब तो आजा रे रंगरसिया।। 
कुछु अब जीव ला नहीं सुहावै।
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

रहि रहि बादर बिजली चमके। 
मन डर्राये बिगन सजन के।। 
सुरता आवै धुकधुकी ला बढ़ावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै।

सँइया बाली मोरे उमरिया।
तोर बिन जिनगानी अधरिया।।
मन समझै नइ कोनो समझावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

मन चुलहा मा धधकत आगी । 
आके जीव कर दे बड़भागी।। 
दिन कटै नइ तो रतिहा पहावै। 
कान्हा तोर बिन जिये नहीं जावै। 

शोभामोहन 



बिरहिन राधा गोहार २

कइसे तोरबिन रहौं बतादे रसिया।

कइसे तोर बिन रहै।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।
मन पियासुधबही तन परबसिया।।

कब बैरीबेरा लाही, वो सुखअंजोरी।
बिरहा मा बरत बसंतीतन होरी।। 
पुरवैया के संग पठोवौं पतिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

बादर चलत धर पुरवाही अँगरी।
कोइलीबैरी रटन करत मनअगरी।। 
काला करलई कहौं मनबसिया। 
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

रतिहा चँदैंनी गिन-गिन के कटत हे।
निर्मोही आशा साँसा नाम ला रटत हे।।
हाँसी मनभावै ना सुहावै बतिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया।

टपटप टपकत ओरीकस नयना। 
उड़त अगास देख पंछी परेवना।। 
उड़ आवै तोर तीर धर पंँखिया।
कइसे तोर बिन रहौं।
बता दे रसिया हाँ बता दे रसिया। 

शोभामोहन


गिंया-गड़ी गीत

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 
मोर मन मा ये कइसन लगन लगथे रे।। 
जानथस का बता मोर तो बाली उमर, 
कइसे मधुबन में मन के अगन लगथे रे। 

अतका ब्याकुल हवौं तन के सुधबुध नहीं। 
देह प्यारापिया के भुवन लगथे रे। 
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

आँखी खोजत बही बनके साँवर पिया। 
गैरी माते सहीं मोर मन लगथे रे।।
होगे हावै मोला आजकल का गड़ी। 

कइसे काला कहौं रात के बात ला, 
आनीबानी के सपना सजन लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

साँसा साँसा में मोर बाजथे प्रिय के धुन, 
देह मोर बाँसुरी के असन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

कोजनी काय मोहनी खवाये हवै, 
जीव उबुक-चुबुक बुड़न लगथे रे।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

नेग अउ जोग के चलावौ तुमन, 
मोला बिरथा जगत के चलन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

आगे सुम्मत मया के खोजत मोर घर, 
अब तो सरसब मोला मोर सजन लगथे रे।।
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

मैं न आहूँ लहुट के पियागाँव ले, 
जग ले बढ़के पिया के चरन लगथे रे। 
होगे हावय मोला आजकल का गड़ी। 

शोभामोहन 


आँखी खोजत माखनचोर

गुड़ी करत हे चारी मोर। 
पूछत हे महतारी मोर।। 
घेरीबेरी ओखी जोर, 
काला देखे जाथस खोर।
आँखी खोजत माखनचोर।।

बननबनन बिहरत हे पाँव।
जीव लगे हे आखिरी दाँव।। 
दिखत नइ हे ओकर छाँव। 
कहाँ लुकागे बिरिजअँजोर।।
आँखी खोजत माखनचोर।।

चंदन टिपका टीके माथ।
ग्वालबाल के धरके हाथ।।
बँसुरी बछरू गैया साथ।। 
धड़धड़ धड़कत छाती मोर।। 
आँखी खोजत माखनचोर।।

शोभामोहन 

झन तो बरस अतका रे बादर

झन तो बरस अतका रे बादर
जीव हमर डर्रागे।
बरसासुम्मत श्यामपिया बिन,
आँसू पझरत जागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

अगन असन छटकत बूंदियन,
तन बिरहा दहकागे।
बननबनन गिंजरत बिरहिन के,
जगसुखगाँव गँवागे।।
झन तो बरस अतका रे बादर

मेचकी-मेचका राग अलापत,
जुगजोड़ी संग आगे।
तरिया-ड

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