Wednesday, 22 March 2023

शोभामोहन के छत्तीसगढ़ी बिहावगीत


३/बिहावगीत

जुगुर बुगुर बरै मड़वा मा कलशा,
धुकुर पुकुर जीव होय।।
आँखी पुतरी दुलारी रानी बिटिया,
झरझर झरझर रोय।।

एके कोख जनमाये भाई अउ मोला ददा,
आज फेर कर देस भेद।।
भइया ल दिये घर खेत खार बखरी,
मोला दिये परदेस।।

शोभामोहन
०१/०१२/२०२१


४/बिहाव गीत

ऊँच ऊँच महल टेकाये तैं राजा ददा।
बींच बीच खिरखी लगाय हो।
तेकरे बरेंडी बइठे बोलत हावै सुवना,
मगन प्रभु के गुन गात हो।।

हरदी छिटका देके भेजे पतिया बड़ दूर।
लिख तोर समधी के नाम हो।
चिठिया ला पढ़ ओ तो आहीं बिहाये बर,
बेटवा के धरके बरात हो।।

नइ लेगैं सोना चाँदी धन धोगानी समधी,
सुवना ला माँगे मन ठान हो।
हाँसत आही ददा धरके बरतिया ला,
सुआ जाही आँसू चुचवात हो।।

शोभामोहन
०१/१२/२०२१
पाटन

५/बिहाव गीत
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बने पहाबे हाँसत गावत दिन, हाँसत गावत दिन।
जाना हे तोला ससुरार।
मइके के डेहरी पहुना बन जाबे, पहुना बन जाबे।
छूट जाही मया परिवार।।

ससुरे में सब संग हिल मिल रहिबे, संग हिल मिल रहिबे।
ससुरारी घर बोहे भार।
कभू उराठिल भाखा झन कहिबे,भाखा झन कहिबे।
मया मान देबे अउ दुलार।।

गोठ सिखौना गँठिया के धर ले, गँठिया के धर ले।
होय भोरहा झन कर बिचार।
संग पिया के छँइहा बन चलबे,छँइहा बन चलबे।
घर के बन जाबे तैं अधार।।

शोभामोहन
३०/११/२०२१
पाटन
६/बिहाव गीत

गाँव गाँव गिजरेंव बेटी तोर बर खोजे,
नइ जानेंव का लिखे तोर भाग ओ।।
पहिली पहिली ससुरारे ले आये,
कइसन हे तोर ससुरे के लाग ओ।।

का सुख पाये तैं बेटी दुलरु के डेहरी,
काकर हे कइसन बेवहार ओ।
सब सुख हावै दाई ससुरे में हमर तो,
मया दया भरे हे परिवार ओ ।

जेठानी देवरानी तोर कइसन कइसन,
देवर ननदिया के हाल ओ।
कइसन हावै तोर सँइया गोसँइया,
क इसन काकर खियाल ओ।

आये ससुरार ले तैं पहिली पहिली बेटी।
कइसन हे तोर ससुरे के लाग ओ ।।

शोभामोहन
२९/११/२०२१
पाटन
७/बिहावगीत

मोर दुलौरिन बेटी खेलै अउ कूदै,
सीखे नहीं करे घर काज।
जाये ससुरे बइठत हस डोला,
लेगे खड़े दुलरू समाज।।

कोने तोला बड़े बिहिना जगाही,
कोने गाँथही चूँदी तोर।
कोन हा देही दतुवन ला कुचर के।२
कोन नहवा के करही सिंगार।।

सास जगाही मोला बड़े बिहिनिया,
जेठानी कोरही मूँड़ मोर ।
ननदी देही दतुवन ला कुचर के।
नवाइन करही मोर सिंगार।।

शोभामोहन
३०/११/२१
पाटन

८/बिदाई गीत छत्तीसगढ़ी
( बेटी के कलकुत)

लालाला लालालाला लालाला लालालाला
लालाला लालालाला लाल हो।

मइके के मया दया कइसे भुलाहूँ दाई।
भेजत हौ मोला ससुरार हो।
सोनहा हिंडोलना मा कतको झुलाही तभो।
दुख पाही जिवरा हमार हो।
सोना के सीत्था भले जेंवन कराही जोंही।
सुरता आही तोर दुलार हो।
अक्ती मड़वा चुकिया पोरा खेले संगी।
छूटे घर अँगना दुवार हो।
घेरी बेरी सुरता के बदरी छवाही घन।
बोहाही अँसुवन के धार हो।।
तिरिया के जन्म बिधाता काबर दिये होही।
सहे बर दुख ला अपार हो।।
शोभामोहन
१८/११/२०२१

९/बेटी बिदा गीत

का तोला देवौं बेटी मइके के चिन्हारी।
ओली धर ले असीद  राजदुलारी।।
पाँव झन काँटा गड़े मिलै सुख सारी।
सोन के पुतरी मोर घर उजियारी।
ओली धर ले असीद  राजदुलारी।।

चूरी चूरा देहूँ बेटी, टूटी फूटी जाही ओ।
सतरंग लूगा देहूँ रंग छूट जाही ओ।।
मरत जीयत संगदेवा संगवारी।
ओली धर ले असीद राजदुलारी।।

लोहा मुरचाही बेटी काठ घुना खाही ओ।
सोन चाँदी देहूँ तेनो टुटही खियाही ओ।
काटे नइ सकै जेला बेरा कटारी।
ओली धर ले असीद राजदुलारी।।

शोभामोहन

१०/१ /(बिहतरा सोहाग गीत)

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
अँगरी धरे सुवासिन ठाढ़े बिलरी ओरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
आवौ कुम्हारिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

आवौ मरारिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह  सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

आवौ बरेठिन, करौ सोलह सिंगरिया।
करौ सोलह  सिंगरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

लानौ डुमर पिढ़ुली लानौ करसा कलौरी।
लानौ करसा कलौरी।
धरा हँथवा नरियर, सुमरन कर गौरी।।
अँगरी धरे सुवासिन ठाढ़े बिलरी ओरिया।
सेंदुर दे दौ दुलहिन सोहागिन तिरिया।

शोभामोहन श्रीवास्तव
१३/१०/२०२१
पाटन

सोहागगीत

बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
फूफू के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजा झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
मामी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी, बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।
सबके सोहाग हावै अलवा जलवा अउ,
भउजी के देये सोहाग अटल हे ना।
बाजै बाँस भोंगरी , बाजै झल्लर डफली।
आज बिलरी के माँग में मोर हीरा बसे ना।।

शोभामोहन




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