तोर शरण हौं शंकरभोला (राग धनाश्री)
तोर शरण हौं शंकर भोला
राम भगति दे मोला।।
तैं जीते प्रभु तीनो पुर ला,
बइठे मगन अबोला।।
तोर शरण हौं शंकरभोला
रतिपति के हे भसम करैया,
आरुग बुध दे मोला।
लहर लगा दे भक्ति जगा दे,
ये जग आगी गोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला,
काशी वासी जगत उदासी,
पार लगा दे चोला।
कोन परम पद पाथे जोगी,
मैं नइ जानौ ओला।
तोर शरण हौं शंकरभोला,
हे कैलाशी भवदुखनाशी
सुमित हावौं तोला।
भाग उविस तब जनम मिले हे,
मनखे देह अमोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला
अउ झन भटकै शोभामोहन,
बदलत बदलत चोला।
तोर शरण हौं शंकरभोला
राम भगति दे मोला।।
तोर शरण हौं शंकरभोला
शोभामोहन
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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