मत्तगयंद सवैया
कोन करा कवने सुख पाथे
१/
श्वान ह श्वान गधा ह गधा अउ काग ह काग करा सुख पाथे।
हंस ल हंस बिलाव बिलाव ल गाय ल गाय खड़े खजुवाथे।
बाघ ल बाघ सियार सियार ल गिद्ध ल गिद्ध शिकार सिखाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरुखे हर भाथे।
२/
शुद्ध ल शुद्ध अशुद्ध अशुद्ध ल बुद्ध कती अउ बुद्ध तिराथे।
चोर ह चोर सजोर सजोर व ढ़ोर ह ढ़ोर कती ढ़कलाथे।
दुष्ट ह दुष्ट अपुष्ट अपुष्ट व रुष्ट ह रुष्ट मिलै सम जाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।
३/
लिप्त ल लिप्त अलिप्त अलिप्त ल, दिप्त ल दिप्त चिन्हे सक पाथे।
रिक्त ल रिक्त अरिक्त अरिक्त ल सिक्त ल सिक्त
समोखन जाथे।
भक्त ह भक्त अभक्त अभक्त विभक्त विभक्त मिलै हरसाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।
४/
बैद ह बैद सुजान सुजानिक ज्ञान बढ़ावन खोजत धाथे।
हाँ कवि खोज करै कवि के बुधरंजक आखर ला चबुलाथे।
राग भरे मनखे रंँग बूड़न खातिर सौ परपंच लगाथे।
बिग्य ल बिग्य सियान सियान ल मूरख ला मुरखे हर भाथे।
शोभामोहन श्रीवास्तव
२८/०६/२०२१
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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