शब्द ले मन बाँध पाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
जगत सुघराई दिखाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
बिन प्रयोजन जेन भाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
चित्त ला जेने भिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
लहरआनंद के उठाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रसरसिक में पचपचाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
जेन हिरदे ला रिझाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बोध सुघरई के कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव ला परघा बलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
संग में सबला बहाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बेग हिरदे उमड़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव उच्चारित कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नितनवेली भाव गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चेत ला जे उजराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चित्तपंकज ला खिलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भावसात्विक रिगबिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
परमानंद मन पधराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
प्रभु डहर पग ला बढ़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नस भीतर ला झनझनाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रोगभवभावी मिटाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
शास्र ला जे दुहराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बिरंची शिव विष्णु गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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