Tuesday, 8 July 2025

बस उही ला गीत जानौ।

शब्द ले मन बाँध पाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
जगत सुघराई दिखाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
बिन प्रयोजन जेन भाथे,
बस उही ला गीत जानौ।
चित्त ला जेने भिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
लहरआनंद के उठाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रसरसिक में पचपचाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
जेन हिरदे ला रिझाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बोध सुघरई के कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव ला परघा बलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
संग में सबला बहाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बेग हिरदे उमड़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भाव उच्चारित कराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नितनवेली भाव गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चेत ला जे उजराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
चित्तपंकज ला खिलाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
भावसात्विक रिगबिगाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
परमानंद मन पधराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
प्रभु डहर पग ला बढ़ाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
नस भीतर ला झनझनाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
रोगभवभावी मिटाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
शास्र ला जे दुहराथे,
बस उही ला गीत जानौ ।
बिरंची शिव विष्णु गाथे,
बस उही ला गीत जानौ ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...