Tuesday, 8 July 2025

फुलवारी ले भौरा उड़ाही गड़ी।

डुँहड़ू कतको भले डुँहड़ाही गड़ी।।
नेवता पार फुलवा बलाही गड़ी।।
बेरा होवत मया राग सब्बो भुला,
फुलवारी ले भौरा उड़ाही गड़ी।
कोनो कतको मया पलपलाही गड़ी।
राग धर पाग सुर-ताल गाही गड़ी।।
पान-पुरइन ठहर जल नइ पाही गड़ी।
जेन आही गड़ी तेन जाही गड़ी ।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
महुदा

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