Tuesday, 8 July 2025

पद्धरि छन्द) हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

(पद्धरि छन्द) हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।
बइठे हस सबमें तैं पधार।।

सोरियावौं गावौं तोर गीत। 
सहि घाम झाँझ अउ जूड़ सीत।।
झनकत तनबीना तार तार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

नइ जानौ पूजा पाठ रीत।
हे तोर हाथ अब हार जीत।
मैं अप्पड़ अड़हा बड़ गँवार।।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।

बुद्धि सुद्धि बल हे न ज्ञान।
हरहर कटकट में परे प्रान।।
मलकत डोंगा भव माँझधार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

मन में बगरा पबरित सुगंध।
छूटौं भवजल होवौं उछंद।
बोहावौं झन जग के बयार।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

जग के टेके के तैं अधार।
सब जीव जंतु हे तोर भार।।
सचराचर जग के धरनधार।।
हरि सुंदर साँवर सुन गोहार।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
१७/०३/२०२३

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