Tuesday, 8 July 2025

चुनावी दोहा

चुनावी दोहा

बड़हर भारत देश के, ऊँचा होवै नाम।

सत्ता दौ वोला जउन, करै देस बर काम।।

सत्ता के महिमा अबड़, कुरसी जब मिल जाय।
मरहा मुसुवा मन घलो, घुसघुस ले मोटाय।

सत्ता के महिमा अबड़, जेन पाय चिकनाय।
देश लूट जनता धिरो, माल डकारत जाय।।

सत्ता के महिमा अबड़, भीड़ लगे दरबार।
भाड़ा के बनिहार मन, करथे जय जयकार।।

मुफतखोर जनता जिहाँ, होय राजधन नास।
मंत्री भ्रष्टाचार के, उहाँ रचै इतिहास ।।

मुफतखोर जनता जिहाँ, चाहै फोकटमाल।
उहाँ भ्रष्ट नेता उवै, खउहा नटवरलाल। ।

मुफतखोर जनता जिहाँ, भ्रष्ट उहाँ सरकार ।
देश राज कल्यान नइ, जावै धारे धार।।

चगल डरिन कुसियार कस, जुठलंगरा मन देस।
खीसा गरू अपन करिन, बूता करिन भदेस।।

जेन देश ला बाँट के, करना चाहत राज।
चुन्दी उँकर हपाट के, जँउहर कर दौ आज।।

ईडी के सोंटा परत, बफलत जम्मो पाप।
जेल धंधावत ठग सबो, नवत सबो के ताप।।

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