Tuesday, 8 July 2025

जनम मरन के लहरा डोलत, डोंगा देहतरैया हरिगुरु।

जनम मरन के लहरा डोलत, डोंगा देहतरैया  हरिगुरु।
प्रकृति विकृति ले अलग-बिलग कर, भवदुख तापहरैया हरिगुरु ।।

जाला झार उझार बहार हिय, सब सुगुन भरैया हरिगुरु ।
करम खेत ला बोंय बराये, हरिया सुघरधरैया हरिगुरु ।

देह प्रान बस प्रान ईश बस, मुक्ति प्रानकरैया हरिगुरु।।
राज ऊपर विधि शासन रच, सुगम सुरीत चरैया हरिगुरु।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

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