सुवदना छन्द
लाला लाला लालाला, ललल लललला, लाला लललला ।
माटी लोन्दा ये चोला, अगन भुवन में, खेलै भकभका ।
काया माया आँखी ला, चटक-मटक में, छेंके चकचका ।।
होती गोती सोती ला, सक नइ समझे, घूमैं बकबका ।
हुद्दा-हुद्दी खाबे रे, बिगन भजन के, मेला जकजका।
अंगी रंगी संगी तो, कुछ पग चलही, संगे लकलका ।
बेरा हा ढेरा आँटे, रँग-चँग उधड़े, धागा सकसका।
ऐती वोती झाँके ले, गत नइ सुधरै, जाबे थकथका ।।
माटी हाँड़ी फूटे में, छिन भर लगही, गे हे पकपका ।
बाँचे बेरा साँसा ला, झन कर बिरथा, भौंरी जकजका।
गिल्ला-गिल्ला माटी में, हरिगुन थरहा, बों दे
छकछका ।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
08/07/2025
शुभस्थान-महुदा
कोनो ज्ञानी ही जाने, रहन बसन ला, लेटा बिन लगे ।
गावै ध्यावै आत्मा ले, हरि सुमिरन के, सेती सुध जगे ।।
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