अस्सी बीस कथा
1/
अस्सी के काटे मुड़ी, टँगली टेंवत बीस।
अपन भगत के अब तहीं, रक्षा कर जगदीश।।
2/
कभू बनत बिद्यारथी, कभू बनत
सरदार।
कोहा पथरा मार इन, हक खवात सरकार।।
3/
बपरी खानम आरफा, बपरा रबीश कुमार।
बोझा बोहे देश के, दूनो पत्तरकार ।।
5/
अस्सी डोमी साँप ला, बीस ढ़ोड़िहा डरुवात।
कतका अजगुत बात हे,
अस्सी के काटे मुड़ी, टँगली टेंवत बीस।
अपन भगत के अब तहीं, रक्षा कर जगदीश।।
2/
कभू बनत बिद्यारथी, कभू बनत
सरदार।
कोहा पथरा मार इन, हक खवात सरकार।।
3/
बपरी खानम आरफा, बपरा रबीश कुमार।
बोझा बोहे देश के, दूनो पत्तरकार ।।
5/
अस्सी डोमी साँप ला, बीस ढ़ोड़िहा डरुवात।
कतका अजगुत बात हे,
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