Tuesday, 8 July 2025

अस्सी बीस कथा

अस्सी बीस कथा
1/
अस्सी के काटे मुड़ी, टँगली टेंवत बीस।
अपन भगत के अब तहीं, रक्षा कर जगदीश।।
2/
कभू बनत बिद्यारथी, कभू बनत
सरदार।
कोहा पथरा मार इन, हक खवात सरकार।।
3/
बपरी खानम आरफा, बपरा रबीश कुमार।
बोझा बोहे देश के, दूनो पत्तरकार ।।
5/
अस्सी डोमी साँप ला, बीस ढ़ोड़िहा डरुवात।
कतका अजगुत बात हे, 

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...