Wednesday, 9 July 2025

मुक्तक

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दुख भरे लय-ताल-सरगम धुन इहाँ नाचत सबो।
सुख-सधौरा-साध अउ दुखग्रंथ ला बाँचत सबो।
शोभामोहन श्रीवास्तव
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सब नर्तक हैं सब गायक है।
परमपुरुष सबका नायक है।।
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सिरजनधरम जग आनंदसोती आय रे।
जेन कुछु नइ सिरजै नंगत दुख पाय रे।।
कोनो हे कँझाय रे कोनो हे बगियाय रे।
जेने सिरजे बर सीखै वो मजा उड़ाय रे।।

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बँटहू तौ खच्चित कट जाहू

आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
गाँव गाँव में रक्सा पइधे, ठाँव-ठाँव में खड़े कसइया।।
बँटहू तौ खच्चित कट जाहू, कोनो नइ हे तुँहर बचइया ।।
आज वोट ले काम बनत हे, मिलके काम बना लौ भइया ।
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