Friday, 11 July 2025

आकृति बिखर गई, प्राण लीन हो गया।

आकृति बिखर गई, प्राण लीन हो गया।
देह गेह में बसा, प्राण लीन हो गया।।
पंचतत्व में मिला, फिर नवीन हो गया।
फिर विषयविकास से, मन मलीन हो गया।
मोहजाल में फँसा, फिर अधीन हो गया।
देह रुग्ण हो गया, जीव क्षीण हो गया।
झूठ द्रोह दुष्टता, अतिप्रवीण हो गया।
रत्न को गुमा दिया, और दीन हो गया

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

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