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तहीं पसर के नभ बन जाथस
तहीं सिकुड़ के कन।
मयाजग्य के अगनकुंड में,
अउ बन जथस हवन ।।
साध सकौं नइ सकों भगवन ,
रहिथौं करत भजन।
तहीं मोर सब नता गोता अउ,
हिरदे बसे सजन ।
एक तोर ले लगा आसरा,
तोरे धरौं चरन ।
सबो शब्द लठरत झुमरत हे,
तभो करौं बरनन ।
छाती तोरे मड़ाय धुकधुकी,
करत तोर सुमरन।
अँगरी धर अँगिया ले अब तैं,
बंद करा घुमरन।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
तहीं पसर के नभ बन जाथस
तहीं सिकुड़ के कन।
मयाजग्य के अगनकुंड में,
अउ बन जथस हवन ।।
साध सकौं नइ सकों भगवन ,
रहिथौं करत भजन।
तहीं मोर सब नता गोता अउ,
हिरदे बसे सजन ।
एक तोर ले लगा आसरा,
तोरे धरौं चरन ।
सबो शब्द लठरत झुमरत हे,
तभो करौं बरनन ।
छाती तोरे मड़ाय धुकधुकी,
करत तोर सुमरन।
अँगरी धर अँगिया ले अब तैं,
बंद करा घुमरन।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
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