Wednesday, 30 July 2025

तहीं पसर के नभ बन जाथस

*तहीं पसर के नभ बन जाथस
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तहीं पसर के नभ बन जाथस
तहीं सिकुड़ के कन।
मयाजग्य के अगनकुंड में,
अउ बन जथस हवन ।।

साध सकौं नइ सकों भगवन ,
रहिथौं करत भजन।
तहीं मोर सब नता गोता अउ,
हिरदे बसे सजन ।

एक तोर ले लगा आसरा,
तोरे धरौं चरन ।
सबो शब्द लठरत झुमरत हे,
तभो करौं बरनन ।

छाती तोरे मड़ाय धुकधुकी,
करत तोर सुमरन।
अँगरी धर अँगिया ले अब तैं,
बंद करा घुमरन।।

शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन 

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