लालालाला लालाला
बस्तर मोर पुराना हे।
गजब कठिन धोवाना हे।
मतलाये तरिया पानी।
अउ काई के रजधानी।।
कामबूता अउ तेलघानी।
मतलाये तरिया पानी।
कोटकोट ले हे चिटियाये।
भकर भकर ये बस्साये।।
सबो लाभ होगे हानी।
मतलाये तरिया पानी।
खीसा में नइ पाई हे।
माटीराख न भाई हे।।
लाग-नता बदले बानी।
मतलाये तरिया पानी।।
जे पथरा मूँड़ धारे हौं।
तेला गोड़ कचारे हौं।।
देखत जग आनीबानी।
मतलाये तरिया पानी।।
जेकर संग हे गुरलाटा।
साने उही लुगरा पाटा।।
सीखा देवत नादानी।
मतलाये तरिया पानी।।
शोभामोहन
11/05/2023
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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