Thursday, 19 June 2025

माँ के सच्चे लाल जगो"

"माँ के सच्चे लाल जगो"


जागो जागो भारतवासी
पढ़ गीता संदेश जगो।
वेद शास्त्र उपनिषद आदि पढ़,
चलो बचाने देश जगो।।


अरे करोड़ हिन्दू में से,
माँ के सच्चे लाल जगो।
बलिदानों से ही भारत का, 
होगा ऊँचा भाल जगो।।

सदियों में अवसर आया है,
चलो मिटाने रोग जगो ।
जगो बगल में छुरा छुपाये,
खड़े कसाई लोग जगो।।

सर्वनाश से पहले पसरे, 
सन्नाटे को भाँप जगो।।
आतंकी के देख इरादे,
शत्रुनाश को आप जगो ।।

छल प्रपंच मद मत्सरता भर,
जागा है उन्माद जगो।
क्या मतलब जगने का यदि तुम, 
बर्बादी के बाद जगो ।।

भांति-भांति के भेस बनाकर,
घूम रहे जल्लाद जगो।
काला साया देश न निगले, 
बनकर तुम फौलाद जगो।।

मनोरोगियों के विनाश बिन, 
नहीं बचेगा देश जगो।
बिना तुम्हारे सज्य हुए अब, 
नहीं मिटेगा क्लेश जगो।।

ठौर ठिकाना एक यही है, 
मन में भरकर रोष जगो ।
नहीं जगे तो नहीं बचोगे,
जागो सब बेहोश जगो ।।

गला कट रहा है चुन चुनकर, 
अब तो होकर क्रुद्ध जगो। 
बिना बिगुल आरंभ चुका, 
यह अदृश्य सा युद्ध जगो।।

शत्रु तुम्हे डरपोक मानकर, 
लगा चुका है घात जगो। 
धर्म बचाने ऊँच नीच और, 
भूल जात और पात जगो।। 

मंडी में ना बिके नारियाँ
कटे ना बाल गोपाल जगो।
आस्तीन में छुपे साँप ये, 
डस ना लें तत्काल जगो।।

शांत भिक्षुओं की प्रतिहिंसक,
देख पराक्रम वार जगो।
देश बनी है समरभूमि तब,
थूके ना संसार जगो ।

जगह जगह पर छुपे देश में,
गद्दारों के यार जगो ।
देश फूँकने वालों के संग,
दिल्ली की दरबार जगो।।

कालखंड ने थोप दिया है,
यदि अब तुमपर युद्ध जगो।
शुतुरमुर्ग बन सिर न छुपाओ,
विस्फोटक हो क्रुद्ध जगो।।

कैंडल मार्च निकालो मत अब,
लहराने हथियार जगो।
दुष्टों को यमपुर पहुँचाने,
करने निज उद्धार जगो।।

खुल्लमखुल्ला अब ललकारो,
शौर्य दिखाने श्रेष्ठ जगो ।
गलाकाट संस्कृति से लड़ने,
सुस्त न रहो सचेष्ट जगो ।।

जिनको डर लगता भारत में,
उन सबको ललकार जगो ।
बालीवुड के सर्वनाश को, 
अब होकर तैयार जगो।।

लाश भरी रेलें आयी थी,
खुद पर कर धिक्कार जगो।
अब्बू चच्चा देश बाँटकर,
बन बैठे सरदार जगो।।

जात पात में तुम्हे बाँटकर,
बहुत बनी सरकार जगो।

जय श्रीराम लगा जयकारा,
अब करने प्रतिकार जगो।
नहीं जगे तो मिट जाओगे,
मृत्यु खड़ा हर द्वार जगो ।।


शोभामोहन काम जगाना
पढ़कर तुम इतिहास जगो ।
भारत माता का तुम पर से,
टूटे मत विश्वास जगो ।।


शोभामोहन श्रीवास्तव

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