Friday, 20 June 2025

"योग " दोहा

"योग "

संस्कृत के "युज" धातु से, शब्द बना है योग l
भिन्न भाँति इस योग का, करते लोग प्रयोग ll

प्रथम आदियोगी हुए, महादेव सुखधाम l
जिनका लेते योग में, सब आदर से नाम ll

योग जनक ऋषि पतंजलि, हुए आधुनिक काल l
"योगसूत्र" जिसने रचा,धन्य गोणिका लाल ll

योग मिटाते रोग को, इसके कई प्रमाण l
सब सात्विक गुण युक्त हो, करें जगत कल्याण ll

मूल रूप से योग का, होता चार प्रकार l
कर्म व भक्ति ज्ञान तथा, राज योग सुखसारll

हठ लय तंत्र त्रिविध भी, हैं अतिरिक्त प्रकार l 
तेज रूप बलवृद्धि हो, हिय में शुद्ध विचार ll

नित्य करें जो योग को, उन्हें न व्यापे रोग l 
निर्विकार मन हो तथा, काया रहे निरोग ll

शोभा मोहन श्रीवास्तव
रायपुर, छत्तीसगढ़
20.06.2025

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