"योग "
संस्कृत के "युज" धातु से, शब्द बना है योग l
भिन्न भाँति इस योग का, करते लोग प्रयोग ll
प्रथम आदियोगी हुए, महादेव सुखधाम l
जिनका लेते योग में, सब आदर से नाम ll
योग जनक ऋषि पतंजलि, हुए आधुनिक काल l
"योगसूत्र" जिसने रचा,धन्य गोणिका लाल ll
योग मिटाते रोग को, इसके कई प्रमाण l
सब सात्विक गुण युक्त हो, करें जगत कल्याण ll
मूल रूप से योग का, होता चार प्रकार l
कर्म व भक्ति ज्ञान तथा, राज योग सुखसारll
हठ लय तंत्र त्रिविध भी, हैं अतिरिक्त प्रकार l
तेज रूप बलवृद्धि हो, हिय में शुद्ध विचार ll
नित्य करें जो योग को, उन्हें न व्यापे रोग l
निर्विकार मन हो तथा, काया रहे निरोग ll
शोभा मोहन श्रीवास्तव
रायपुर, छत्तीसगढ़
20.06.2025
No comments:
Post a Comment