(भाववचन)
का दे सकहूँ तोला नाम
का दे सकहूँ तोला नाम।
सबके अंतस तोरे धाम।।
मालिक जम्मो भूतलखार।
जगतगौंटिया लंबरदार ।।
व्यापक अउ अनादि अपार।
सबके उरथैया जगसार।।
सबोज्योति के परमअधार।
अजगुत सिरजैया संसार।।
तैं रितोवैया गंगाधार।
सबो चराचर के सरकार।।
पानफूल लस-रस मकरंद।
महामतौना मउहामंद।।
छांँदकाट गाये के छंद।
बैरागी के मूठाबंद।।
नदिया-नरवा चंचलपन।
लहराबदन नृत्य थिरकन।।
रंगधनुहा के सबोबरन,
व्यक्तशब्द ले मुक्तकथन।।
गोठ-बात बर जिभियाघाट।
सरगअसन शुभ धरनीआँट।।
जगतमोहनी गमक उचाट।
तैं टोना-जादू के काट।।
रंगहानभ के कीर्तनगान।
सँझाकिरण असन बरदान।।
आरुगमंतर ब्रम्हगियान।
डोंगरफूले फूल समान।।
जमो जीवदल रिगबिग जोत।
बोहावत जललहरी सोत।।
बेदशास्त्र बाचा कहनोत।
सरबाँवट बगरे सब कोत।।
पबरित जलझरना संगीत।
मधुरस घोरत रतिहा गीत।।
बरत चंदैनी बरसत सीत।
गगनगंग अउ मनवामीत।।
सुकुवा भिनसरहा सुखरास।
कुसुमकलीदल रंग-सुवास।।
बिपतपरे जन जब्बरआस।जिये-खाय कलकुत उल्लास।।
निरजनबन पैडगरीबाट।
अलखनिरंजन ठट्ठाहाट।।
दहरापौंठा पट्ठर टाँठ।
जलथल झरना उद्गमघाट।।
कमलकुमुददल हाँसत ताल।
नवापीक के झुमरत डाल।।
बुढ़वापन डोंगा खेवाल।।
जोश जवानी जागेज्वाल।।
जामे डोंगररूख समान।
गगन मगन बादर गतिमान।।
पार छुवत लहरा उफान।
सुघर चंदालोक घरान।।
रैन नैन चुप गुपचुप बात।
आखरमणि गूँथे के ताँत।।
रसगगरी बाँटत बरसात।
भाँवर गिंजरन - घुमरन सात।।
कुँवरभाव पट्टाये फूल।
भिन्नाजग पगरहित अथूल।।
जनम-मरन तन करनी तूल। करमधरम धरसा फल-फूल।।
तातठाँव में जूड़ बयार।
पतझरसुम्मत सुघर बहार।।
तातकुधरी नीर फुहार।
माटीचोला जीवअधार।।
रझरझ बादर आँसूधार।
लउकत लउका लक्क अपार।।
उठे गरेरा झंझर झार।
पापपुन्न अउ बेरापार।।
बाती-दियना सूत-पंतग।
मया-दया सुनता शुभरंग।।
मृगकस्तूरी रहिनीढंग।
सबोलंग रहि सदाअनंग।।
जमोजिनिस के होवन ढंग।
चंदा के जइसे सितलंग।।
दिनकर असन बरत बंगबंग।
निच्चटआरुग सब्बो लंग।।
मलकत दहराडोंगी पाल।।
बने-गिनहा गिरहाचाल।।
सबो जीव रखवार कमाल।
बेरपुरे बर सँउहत काल।।
जतका बूता वतका नाम।
कहूँ नाम लौं दाहिन-बाम।।
सबोनाम हे तोरे नाम।
सबोधाम अउ तोरे धाम।।
पावनप्रभु रट मन नितनाम।।
करत-धरत जग बूता-काम।
रतिहा-बिहिना छँइहा घाम।
साँस साँस सुमिरत गुनगान।।
का दे सकहूँ तोला नाम।
सबके अंतस तोरे धाम।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
रायपुर छ.ग.
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