●पाँच जिनिस के अनगिन खेल●
पाँच जिनिस के अनगिन खेल।
जेन करावत बिरहा मेल।।
अनचिन्ह हावय गाँव सियार।
अनमिट सब मा फेर चिन्हार।।
अपन टकर के आगू हार।
जीव करत जगतिक बेवहार।।
मन के अँगना लाख बहार।
होत तभो कचरा भरमार।।
ईश मिलै अउ आप गँवाय।
खुरचत शुभदिन बादर लाय।।
शोभामोहन हे निरधार।
धर ले हाथ जबर करतार।।
शोभामोहन
०८/०२/२०२१
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