हम वो जमाना के बहू अन
(तीन चार दशक पहिली के बहू मन ला समर्पित)
हम वो जमाना के बहू अन।हम वो जमाना के बहू अन।।
मुड़ ढ़ाक के दुबकत रहन।
आँसू बोहा सुसकत रहन।।
सुख दुख सहत मुचकत रहन।
ककरो ले अउ कुछु नइ कहन।।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
परदेस जावै पति हमर।
हम रहन बइठे गाँव घर।।
राँधन पसावन सबो बर।।
तरसन सुने मइके खबर।।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
ससुरार में घुलमिल रहन।
जब्भे सहन तब्भे लहन।।
जुन्ना पहिन हाँसत रहन।
ननदी ला लुगरा नवा दन।।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
सुकुवा उवत बिहिना उठन।
छिटका छरा द्वारी छिंचन।
खोली अउ रंधनी लिपन।
काँचन चुरेना दनादन।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
छुही लीप छोहर पार दन।
माटी के घर ला सँवार दन।।
तुलसी मा पानी डार दन।।
चौंरा में दियना बार दन।।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
हलछट बछारत ब्रत करन।
चंदा सुरुज पँइया परन।।
सियान के सटका बनन
कनिहा टूटत बूता करन।
हम वो जमाना के बहू अन।।हम वो जमाना के बहू अन।।
देवर ननंद जोखा धरन।
जेठानी जेठ अदब करन।।
सास अउ ससुर ला बड़ डरन।
दाइज के सेती अउ मरन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
सबला जेंवा बढ़िया असन।
मिरचा निमक चटनी गुड़न।।
दू कँउर खाके जीव रखन।
सब सुतैं हम राहेर दरन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
धुंँगियात आगी ला धुँकन।
परिवार के सेती झुकन।
बेवहार बर नइ हम चूकन।
कोनो ला नइ हाँसन थूकन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
मैं मोर नइ बोलन हमन।
घर जग्य मा होवन हवन।।
मैदान छोड़न ना भगन।।
अइसे पिया के रंग रंगन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
कब्भू न मुँहजोरी करन।
हँउला धरन पानी भरन।।
पतिदेव के दाबन चरन।
पिया डेहरी जियन मरन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
आवत ससुर होवन खड़े।
रहि जान लाज सरम गड़े।।
छिप जान देखन जब बड़े।
जानन नहीं झगरे लड़े।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
पबरित रहत गंगा असन।
मइके अउ ससुरे बसन।।
गमकत रहन चंदन असन।
बन फूल घर रद्दा दसन।।
हम वो जमाना के बहू अन। हम वो जमाना के बहू अन।।
शोभामोहन
१०/०५/२०२२
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