Tuesday, 22 April 2025

गीत पझरथे ये का कम हे

गीत पझरथे ये का कम हे 

ठकठक ले सुक्खाय चुआ ले, गीत पझरथे ये का कम हे। 
कबिता के डोला परछन बर, कलम सँभरथे ये का कम हे।। 

छान्ही ले बुलकत गर्दा संग, किरन उतरथे ये का कम हे। 
आखर के फुलवारी क्यारी, मनसुख भरथे ये का कम हे।। 

सरभर चिखला छबड़े हंसा, मोती चरथे ये का कम हे।।
बिगन टकर पैडगरी रद्दा, पाँव पकरथे ये का कम हे।। 

मोह-द्रोह के बइहापूरा, छूवत निकलथे ये कम हे। 
नदिया लहसे डार झमाझम, पंखा झलथे ये का कम हे।।

खड़े अगोरा सुन्ना डिलवा, आसूँ ढलथे ये का कम हे। 
पथराये कठुवाये हिरदे, चिटिक टघलथे ये का कम हे। 

मतलाये बिस्सर तरिया में, कमल छछलथे ये का कम हे।। 
रमजायें पाँखी के सुवना, फेर संभलथे ये का कम हे। 

शोभामोहन

No comments:

Post a Comment

संस्कृत राम स्तुति

शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...