मोबाइल महिमा
मोबाइल मा होत हे,आज जम्मो व्यवहार।
लाग-नता मन छूटगे, अनचिन्हार लगवार।।
अनचिन्हार लगवार, आय हे नवा जमाना।
कोनो सग-सगियात, संग नइ आना-जाना ।।
बस लाइक कमेन्ट, करै वो उतरे दिल में।
दिनभर ओंड़ा देय, हवैं सब मोबाइल में ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
No comments:
Post a Comment