बेरा के कोहा, बिरहा के दोहा
जइसे-तइसे रात ला, अलथी कलथी काट।
भिनसरहा ले आसरा, झाँकत सेंद कपाट।।
महल अटारी मा परे, उबुक-चुबुक जिउ होत।
कोसारेशम ओढ़ना, अँगरा देंह कुढ़ोत।।
छटपट-छटपट मा कटत, बिरहिन के दिनरात।
भोगत तउने जानथे, लगही नानुक बात ।।
उसनिन्दा के बेर मा, सुकुवा लगिस जगान।
सास-ननदिया निरदयी, मारत बोलीबान।।
पानी आही मूँह मा, जब आबे तैं गाँव ।
तोर आत ले फेर मैं, कइसे जीव बचाँव।।
आँखी बाट निहार के, पथरावत हे मोर।
सँइया परदेशी भये, बाँध मया के डोर ।।
बोलत बगियन कोइली , तन-मन भरत उमंग ।
पल-पल छिन-छिन रंगगे, पिया संग के रंग।।
साँसा साँसी परत हे, कोन करै पहिचान।
एक पिया परदेसिया, अउ दूसर भगवान।।
आभा मारत फूल हर, देख गति ला मोर।
तोर पिया परदेश रे, तैं झन मोला टोर।।
सुरता कर ममहात हे, महर महर मन मोर ।
जीव जुड़ावत सुध सबो, आँखी आँसू बोर।।
आज अगोरा पुर जही, होही मुँह अँजोर।
परछी अँगना होत हौं, झाँकत हावौं खोर ।।
घोर डरे हौं मेंहदी, रंँगा डरे हौं पाँव।
फूलबेलबूटा बना, ओकर लिख के नाव।।
रेशमधागा में कढ़े, लुगरा निकलिस लाल।
कतका दिन के बाद तो,बदलिस गिरहा चाल।।
बेनीगजरा डार के, खोचें हौं बनफूल।
फेर हेर संदूक ले, पहिर डरे हौं झूल।।
आरो लेवन सजन के, गोड़ ओरखत कान।
छटपटात मछरी असन, बिन पानी जिउ प्रान।।
निरदैया बेरा बिकट, तब ले चित्त उचान।
सुखबसंत साँवर संँगे, आही हे अनुमान।।
आज दरस के आस में, पानी फिरगे फेर ।
गली-गली भेंटत गियाँ , पूछत ले ले चेर।।
फूलसेज के का करौं, जब सँइया परदेश।
बड़ संसो उपजात हे, मन मा भाव भदेस।।
बेली कस पैजन गड़त, गड़त सोनहा चैन।।
गरगस लागत कंगना, रझरझ बरसत नैन।।
सबो आस तो टूटगे, बाँचिस एक्केआस ।
उहू आस के बासरा, लोचत बनके फाँस।।
हाथ ल ककनी चाबथे, गर ला कंठाहार।
गौंतरिहा सँइया बिगन, बिरथा सब सिंगार ।।
जम्मो बादर उरकगे, चकवी मरत पियास।
बिरहिन के बसवार में, जम्मो तिथि उदास।।
ठुड़गी रुख के फोंक में, घुघुवा हर नरियात।
पोटा काँपत देख तो, जीव पिया सोरियात।।
संग पिया के बीतगे, ओ पल जीयत जान।
बिरहिन के बसवार तो, लगथे मरी समान।।
बासत बन में कोइली, घुघुवा ठुड़गा झाड़।
बिरहिन छपकत नैन ला, सतरंग चुनरी आड़।।
जेवरजट्ठा लूगरा, झन लाहू सरकार।
आँखी तरसत दरस बर, बिरहिन करत गोहार।।
गहना गरगस लागथे, बोली नहीं सुहाय ।
बैरी जइसे बीतथे, बिरहा के दिन हाय।।
गहनागुरिया नइ मँगौं, ररहिन बन प्रिय पास।
मयाखजाना लूटहूँ, मैं एसो चउमास ।।
शोभामोहन
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