तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
ब्रजमंडलमंडन हरि नंदनंदन, बिगन बइटका सुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना हे।
मिल दूराग एकमई बाजिस, खोजौं पल-छिन जुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
सुरता-अगम-बाट में रेंगत, चेत परे कुनकुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
संगम कभू होत नइ जेकर,पारलहर उनदुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
टघलत जबर-हिमालय गंगा, तैं झन होवस उन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
आँच जियानत मयापिरित पर, तन साँसा झन तुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
ठउर ना ठहरे ठग-जग-मग में,
अमरित-जहरा चीखत चीखत, दुख पनकत कई गुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१ क्रोधी संवत्सर
क्ँवार नवरात्रि तिथि पंचमी
महुदा दुर्ग छत्तीसगढ़
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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