Tuesday, 8 October 2024

मंडलमंडन जसुदानदंन, बिगन बइटका सुन्ना रे।

तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
ब्रजमंडलमंडन हरि नंदनंदन, बिगन बइटका सुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना हे।
मिल दूराग एकमई बाजिस, खोजौं पल-छिन जुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
सुरता-अगम-बाट में रेंगत, चेत परे कुनकुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
संगम कभू होत नइ जेकर,पारलहर उनदुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
टघलत जबर-हिमालय गंगा, तैं झन होवस उन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
आँच जियानत मयापिरित पर, तन साँसा झन तुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
ठउर ना ठहरे ठग-जग-मग में,
अमरित-जहरा चीखत चीखत, दुख पनकत कई गुन्ना रे।
तन-मन ला खावत घुन्ना रे।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१ क्रोधी संवत्सर
क्ँवार नवरात्रि तिथि पंचमी
महुदा दुर्ग छत्तीसगढ़ 

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