Thursday, 26 September 2024

मैं फकत अपने धुन अउ ठाट में रहौं।।बन में रहौं घर में रहौं ते हाट में रहौं।

मैं फकत अपने धुन अउ  ठाट में रहौं।।

बन में रहौं घर में रहौं ते हाट में रहौं।
फकत अपने धुन में अउ  ठाट में रहौं।।
गिर के उठ ठाढ़ होके रेंग दँउड़ के,
अब कामधाम बंद कर उचाट में रहौं।

आँच खाँव पाँच खाँव नाच नाच गाँव,
अन्नपूरना रँधनी चुल्हापाट में रहौं।।
झीमझाम छटके नभचँदैंनी दल के दल,
मैं मोर मन के पैडगरी बाट में रहौं।।
बेर जुरत गीत उतरथे अगास ले,
नस नस ला झनझनावत उवाट में रहौं।।
आखर टघल टघल लिखथे गीत बिगारी,
तारा-कूची देके मैं कपाट में रहौं।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
२६/०९/२०२४

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