शोभामोहन तोर भल होगे।
उचकी बुचकी छलकत आँखी,
चुरुवा भर गंगाजल होगे।
सुख हर बुड़गे दुख हर बुड़गे।
दुरिहा सबो छमन्छल होगे।।
दुनिया भर के सबो समस्या,
आज एके छिन में हल होगे।
हरिनबहेरा जीव थिराइस,
दुरिहा सुख-दुख कोतल होगे।।
आज अंजोरी नहडोरी कर,
दुरिहा तन-मन के मल होगे।।
बिगन मोटरी बोक्की बाँधे,
बेरा अड़गे चल-चल होगे।।
करिन हेरौठा धन्यवाद दे,
शोभामोहन तोर भल होगे।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१
२६/०९/२४महुदा डोकरी नवमी।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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