Thursday, 26 September 2024

शोभामोहन तोर भल होगे।उचकी बुचकी छलकत आँखी, तोर चुरुवा गंगाजल होगे।

शोभामोहन तोर भल होगे।

उचकी बुचकी छलकत आँखी, 
चुरुवा भर गंगाजल होगे।
सुख हर बुड़गे दुख हर बुड़गे।
दुरिहा सबो छमन्छल होगे।।
दुनिया भर के सबो समस्या,
आज एके छिन में हल होगे।
हरिनबहेरा जीव थिराइस,
दुरिहा सुख-दुख कोतल होगे।।
आज अंजोरी नहडोरी कर,
दुरिहा तन-मन के मल होगे।।
बिगन मोटरी बोक्की बाँधे,
बेरा अड़गे चल-चल होगे।।
करिन हेरौठा धन्यवाद दे,
शोभामोहन तोर भल होगे।।

शोभामोहन श्रीवास्तव
विक्रम संवत २०८१
२६/०९/२४महुदा डोकरी नवमी।

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