लाल लाला लला लाललाला लला
तार दे तार दे तार दे शारदे।
चित्त के पित्त ला मार दे शारदे ।।
गीत के धार ला छन्द में छाँद दे।
भावखर्रा शबद ब्रह्म में साँद दे।।
उटका खुटका जमो भुर्री तैं बार दे।।
तार दे तार दे तार दे तार दे।
चित्त के पित्त ला मार दे शारदे ।।
भेज तो तैं दिये गीत के गाँव में।
बाँध माया के घुँघरू दुनों पाँव में।।
भाव ला शब्द के रूप सिंगार दे।।
हालथौं बाजथे रेंगथौं टूटथे।
मोर महतारी तोर अँगरी छूटथे।।
तार दे तार दे तार दे शारदे।
चित्त के पित्त ला मार दे शारदे ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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संस्कृत राम स्तुति
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
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