जयकारी (१५मात्रिक छन्द )
का सहरऊ बता भगवान।।
कोनो हर सत ला सहराय।
कोनो तप ला बड़े बताय।।
कोनो पबरिपन मनुसान।
का सहरऊ बता भगवान।।
कहूँ बड़ाई करै समभाव।
कहूँ बड़ाई सरल सुभाव।।
सबके मत हे आने आन।
का सहरऊ बता भगवान।।
कहूँ बड़ाई करथे दान।
कहूँ श्राद्ध तरपन असनाँद।।
करम बाट कहूँ कहै महान।
का सहरऊ बता भगवान।।
कहूँ बड़ाई करै बैराग।
कहूँ गृहस्थी घरहा पाग। ।
कहूँ बड़ौना करथे ज्ञान ।
का सहरऊ बता भगवान।।
कहूँ बड़ाई करथे होम।
कहूँ साँस भर केवल ओम।।
सोहम् बड़े कहैं बुद्धिमान ।
का सहरऊ बता भगवान।।
कोनो मंतर के गुन गाय।
कोनो तंतर धर सुख पाय।।
कोनो तीरथ चारोधाम।
का सहरऊ बता भगवान।।
सबो मुक्ति के रद्दा बाट।
सबो पार उतरे के घाट।।
मन में होवत झींकातान।
का सहरऊ बता भगवान।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन श्रीवास्तव
भदो अंधियारी पीतर पाख डोकरीनौमी तिथि, क्रोधी संवत्सर, विक्रम संवत २०८१
भारत छत्तीसगढ़ दुर्ग ग्राम - महुदा
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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