Monday, 23 September 2024

संखनारी छन्द (वर्णिक छन्द)

संखनारी छन्द (वर्णिक छन्द)

ललाला ललाला ललाला ललाला।

बड़े राम रामा, बड़े श्याम श्यामा।
अरे चेत बामा, बसे मुक्तिधामा।।
भजे जी लगाबे, तभे सुःख पाबे।।
नहीं तो झँवाबे, नहीं आँच पाबे।
महासुःख पाबे, बने तैं थिराबे।।
सबो हा भुलाही, तभे वो जनाही।
न माया नचाही, ये काया कँचाही।।
न बेरा गँवा रे, चले सोझ जा रे।
उही हे सहाई, उही बाप दाई।
भजे में भलाई, अरे मोर भाई।।
गुरू ले मिलाही, बनौकी बनाही।

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