तन भींजत बिन सावन रे !
दाग लगत मन भावन रे!!
मनगंगा तन डुबकी लेवत,
अंतस होवत पावन रे!!
बाजा-रूँजी धिड़कत मन घर,
मंगल लगन लिखावन रे!!
डेरीबाँही फरफत फड़फड़,
सगुन लगत पिय आवन रे!!
असलग नत्ता उसलत सत्ता,
बेरा होवत जावन रे!!
शोभामोहन हरहिन्छा चल,
अटलभुवन सुस्तावन रे।।
शुभचन्द्रसूर्या शोभामोहन
दुआस अंजोरी पाख पिंगल संवत्सर विक्रम संवत २०८१ शुभस्थान-महुदा
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