विम्वच्छन्दः (९।९६पिङ्गल, २।८५ प्राकृत पिङ्गल)
ललल लल लाल लाला।।
उतियइल नंद लाला।
अबड़ तिरछंड चाला।।
उधम बड़ ये मचाथे।
टुरन मन ला लुहाथे।।
बिरिज भर सोर गोई।
ललन बड़ चोर गोई।।
पटक मरकी गिराथे।
गटक दहिया पराथे।।
गजब छलिया छबीला।
करत ब्रज रास लीला।।
गुन गजब हे जरे वो।
बिकट उतलंग करे वो।।
महल चल तो बताबो।
जबर झगरा मताबो।।
दरस कर चैन पाबो।
ह्दय छबि ला बसाबो। ।
शोभामोहन श्रीवास्तव
११/०९/२०२४
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
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