गीत भजन छंद(७)
९/सदग्रंथ गुन बखान सवैया
सब बेद बखान करै उँकरे,
सब शास्त्र उही ल सिधोवत हे ।
सद्ग्रन्थ उहीच अधार बना,
मनके करियापन धोवत हे ।
धर अंतस मा गुन गोठ सबो,
गँठियात उही चक होवत हे ।
अड़हा मनखे अनजान बने,
अँधियार परे अउ रोवत हे ।
शोभामोहन
शोभामोहन श्रीवास्तव (शोभा शर्मा या शुभ चंद्र सूर्या), पति ;- कवि मोहन श्रीवास्तव, प्रपौत्री ;-छतीसगढ़ के प्रसिद्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व् कवि पंडित सुन्दर लाल शर्मा, शैक्षणिक योग्यता ;- स्नाकोत्तर भाषा विज्ञानं , ३)ऋग्वेद प्रथम मंडल , पंचम मंडल का संस्कृत मन्त्र छत्तीसगढ़ी में छंदमय भाष्य हिंदी भावार्थ सहित (प्रकाशनाधीन ), लगभग १० पुस्तकों में कुछ प्रकाशित और कुछ प्रकाशनाधीन
शुद्ध संशोधित रचना-राम-स्तुतिः" ` लोभो नास्ति मोहो नास्ति, शोको नास्ति कामः। अपमानस्य चिन्ता, न पश्यति च दक्षिणं न वामम्॥ रात्रिंदि...
No comments:
Post a Comment