Sunday, 2 June 2024

चंदा कस तोर रास ओ दाई।

दाई


सुख हे सबो तोर पास ओ दाई।

तुलसी दीया उजास ओ दाई।।


तोर रहत ले घर घर लगथे,

तोर बिन जगत उदास ओ दाई।।


सब दुख सहिथस अउ चुप रहिथस

चंदा कस तोर रास ओ दाई।


बिन परतीत के ये दुनिया में,

तोर ले जीयत विसवास ओ दाई।


मया दया अमरित बरसाथस,

चिन्ह मोर भूख प्यास ओ दाई।


कुहुक सरद चउमास घरी में

तैं लगथस मधुमास ओ दाई।।


भार उठाथस मया लुटाथस

बनके भुँइया अगास ओ दाई।


मोर अवरदा बाढ़ै कहिके,

करथस तहीं उपास ओ दाई।


मैं बलिहारी तोर महतारी,

मैं तोर चरन के दास ओ दाई।


शोभामोहन श्रीवास्तव

४/०७/२०२२

दिन सोमवार

महुदा दुर्ग


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