सबो दिरिस तोरे जस गाये
हर मुहरन में तहीं लुकाये ।
सबो दिरिस तोरे जस गाये ।।
भिनसरहा रक्तालाली मा ।
मंँझन छन बुलकत जाली मा ।।
झूलफुलहा के खुशियाली मा ।
आज परनदिन अउ काली मा ।।
तोर होय के ढंग जनाये ।
हर मुहरन में तहीं लुकाये1/
सबो दिरिस तोरे जस गाये ।।
चंदा तारा जुड़वासा मा ।
चित अउ पट दूनो पासा मा।।
सुनता बिमता के बासा मा ।
अनचिन्हार रहिके साँसा मा।।
निचट कलेचुप तँही समाये ।।
हर मुहरन मा तहीं लुकाये।।..2/
सबो दिरिस तोरे जस गाये ।।
गमकत भुँइया फूलवारी मा ।
बेरा के पहरादारी मा ।।
अटलसोहागी सिंगारी मा।
रेफ सोनहा उजियारी मा।।
सरभर सुघरइ तहीं बसाये।
हर मुहरन मा तँही लुकाये ।।...3/
सबो दिरिस तोरे जस गाये ।।
शोभामोहन श्रीवास्तव
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